दिवाली में उपहारों के आदान-प्रदान की बहार रहती है। ऐसे में सगे-संबंधियों से उपहार लेने में कोई अड़चन तो नहीं है, लेकिन जिनसे आपका खून का रिश्ता नहीं है अगर वह आपको महंगा उपहार देते हैं, तो उसका हिसाब जरूर रखिए नहीं तो बाद में आयकर विभाग आपसे हिसाब मांग सकता है।
सांकेतिक तस्वीर
पचास हजार से महंगे उपहार के आदान-प्रदान पर रहती है, आयकर विभाग की नजर
कंपनी सचिव अरुण सिंह के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को त्योहार के दौरान 50,000 रुपये से ज्यादा महंगा उपहार ऐसे व्यक्ति से मिले, जिससे खून का रिश्ता नहीं है तो यह उसकी आय में शुमार होगी। ऐसे उपहारों को आपको आयकर रिटर्न में दिखाना चाहिए। बजट में वित्त मंत्री स्पष्ट कर चुके है कि सगे-सबंधियों से इतर 50 हजार रुपये तक का उपहार आयकर के दायरे में आता है। इस व्यवस्था को नजरअंदाज करने पर आयकर विभाग नोटिस जारी कर कार्यवाही शुरू कर सकता है।
Diwali gift
उपहार का स्पष्टीकरण न मिलने की स्थिति में हो सकती है कार्यवाही
चार्टर्ड अकाउंटेंट अरविंद सिन्हा के मुताबिक परिवार के सदस्यों से मिला उपहार मौजूदा समय वाकई उपहार है, जिस पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता है, लेकिन परिवार से बाहर से मिलने वाले उपहार इस दायरे में नहीं आते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि कुल मिलने वाले उपहारों की कीमत अगर 50 हजार रुपये से ज्यादा हो, तो उसे अपनी आय में स्पष्ट करें।
gift
बैंकिंग, जीएसटी डाटा से होती है खरीद की ट्रैकिंग
आयकर विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक दिवाली के त्योहार पर एक अनुमान के मुताबिक कई हजार करोड़ रुपये के उपहार व्यवसायी अपने क्लाइंट को देते हैं। ऐसे में यह खरीद नकद की गई है या बैंक खाते से की गई है, इस पर विभाग की नजर रहती है, क्योंकि बड़े पैमाने पर अघोषित आय को इसमें खपाया जा सकता है। अधिकारी ने कहा कि मान लीजिए 200 लोगों को एक व्यवसायी 60,000 रुपये के उपहार भेजता है, जिनसे वह आगे चलकर बड़े पैमाने पर व्यवसाय करने वाला है। ऐसे में कुल उपहार की कीमत 1.20 करोड़ रुपये हो गई, जिसकी खरीद कैसे की गई है यह जानने के लिए विभाग विभिन्न स्तरों पर अब गौर करता है। बैंकिंग वित्तीय डाटा और जीएसटी के लागू होने के बाद खरीद की हकीकत का पता लगाना विभाग के लिए आसान है। गौरतलब है कि दो साल पहले दीपावली से पहले सरकार ने नोटबंदी की घोषणा की थी। इसके बाद बड़े पैमाने पर आयकर विभाग ने अभियान चलाया था।