अब ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने द्वारा बेचे जा रहे कंज्यूमर गुड्स जैसे कि दूध, दही, फल और सब्जी की एक्सपायरी डेट और एमआरपी की जानकारी देनी होगी। अगर कंपनियों ने अपनी वेबसाइट्स पर इसकी जानकारी नहीं दी तो वो सामान नहीं बेच पाएंगी। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं।
23 जून को जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, मंत्रालय ने अपने लीगल मेट्रोलोजी (पैक्ड कमोडिटी), 2011 के नियमों में बदलाव किया है। इस बदलाव से ई-कॉमर्स कंपनियों को भी इसके दायरे में लाया गया है। इन नियमों के अनुसार अब कंपनियों को खाने-पीने का सामान बेचने पर यह भी बताना होगा कि वो किस देश में बना है।
ये ई-कॉमर्स कंपनियां बेचती हैं खाने-पीने का सामान
जो कंपनियां देश में ग्रोसेरी बेचती है, उनमें ग्रोफर्स, बिग बॉस्केट, फ्लिपकार्ट और अमेजन शामिल हैं। इनमें ग्रोफर्स और बिग बॉस्केट अपने यहां स्टॉक रखती हैं। वहीं अमेजन और फिल्पकार्ट किसी भी तरह का स्टॉक अपने पास नहीं रखती हैं।
ऐसे में अब इन वेबसाइट्स पर सामान बेचने वाले विक्रेताओं को पूरी तरह की जानकारी देनी होगी। इसमें कंपनी की जिम्मेदारी होगी कि वो नए नियमों का पालन सुनिश्चित करेगी।