कॉरपोरेट कर में कटौती के चलते देश की शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध कंपनियों को 37,000 करोड़ रुपये की कर बचत होगी, जो सरकार के अनुमान का लगभग एक-चौथाई है। क्रिसिल रिसर्च ने रविवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही। क्रिसिल ने कहा, ‘बीते कुछ दिनों से भारतीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती को दूर करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। हालांकि शुक्रवार की घोषणा सबसे बड़ी थी।
हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि इन 1,000 कंपनियों को 37,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है, जो सरकार के कुल बचत के अनुमान का लगभग एक चौथाई है।’ एजेंसी ने कहा कि कर की दर में कमी से भारत ज्यादातर एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के बराबरी की स्थिति में आ गया है। क्रिसिल ने कहा, ‘क्रिसल रिसर्च के विश्लेषण में 80 से ज्यादा क्षेत्रों की लगभग 1,000 कंपनियों को शामिल किया गया, जिनका बाजार पूंजीकरण एनएसई की 70 फीसदी कंपनियों के बराबर था। इससे संकेत मिलते हैं कि बीते पांच साल के दौरान कर की दरों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।’
इन कंपनियों ने भारत के उद्योग जगत के कुल कर भुगतान में लगभग एक-तिहाई का योगदान किया। एजेंसी ने कहा, ‘ये अनुमान वित्त वर्ष 2019 के कर पूर्व मुनाफे पर आधारित हैं। इसे देखते हुए हम इस वित्त वर्ष में भारतीय उद्योग जगत के राजस्व और एबिट्डा (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और ऋणमुक्ति से पूर्व आय) में 5-6 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैँ। इससे कंपनियों की बचत खासी बढ़ सकती है।’ सरकार ने शुक्रवार को घरेलू कंपनियों को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए सभी सेस और उपकर सहित कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर घटाकर 25.17 फीसदी कर दी थी।
बैंकिंग और एफएमसीजी को होगा फायदा
आईसीआईसीआई डायरेक्ट रिसर्च ने कहा कि सरकार की कॉरपोरेट कर में कमी की घोषणा से बैंकिंग और एफएमसीजी जैसे सेक्टरों को फायदा होगा, लेकिन आईटी और फार्मा को मामूली फायदा होगा क्योंकि वर्तमान में इनकी कर की प्रभावी दर खासी कम है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘आर्थिक विकास को गति देने के लिहाज से सरकार का यह कदम खासा अहम है।’ इसका तत्काल प्रभाव यह होगा कि इससे उद्योग जगत के लिए नकदी का प्रवाह बढ़ेगा, जिसे कर्ज घटाने या निवेश बढ़ाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।