दरअसल, विभिन्न उद्योग निकायों के माध्यम से व्यापारियों ने आरबीआई और सरकार से प्रस्तावित प्रणाली को रखने का आग्रह किया, क्योंकि ऐसा माना जाता था कि यह मोबाइल, यूटिलिटी और अन्य बिलों के ऑटो-पेमेंट और ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्लेटफार्मों के सदस्यता शुल्क को बाधित करता है। ऐसे में बैंक आपके क्रेडिट या डेबिट कार्ड्स पर ऑटोमेटेड पेमेंट्स के नए रिक्वेस्ट्स को प्रॉसेस नहीं कर पाएगा। ऐसे में यूजर्स को अमेजन प्राइम की तीन महीने या सालाना मेंबरशिपल लेना होगी।
आरबीआई की गाइडलाइंस के अनुसार, 5000 तक के ट्रांजेक्शन के लिए एडिशनल फैक्टर ऑथेंटिकेशन की जरूरत होगी। पहले इसकी डेडलाइन अगस्त 2019 रखी गई थी, लेकिन बाद में इसे 30 सितंबर, 2021 तक बढ़ा दिया गया। बता दें कि आरबीआई ने नए नियमों की घोषणा अगस्त 2019 में की थी और बैंकों व वित्तीय संस्थानों के लिए इस साल 30 सितंबर के लिए एक विस्तारित समय सीमा निर्धारित की गई है। यह समय सीमा ग्राहकों को किसी भी असुविधा को रोकने के लिए बढ़ा दिया था।