सामान्य दिनों में सैनिटाइजर और मास्क का उपयोग अस्पताल में चिकित्सक और ऑपरेशन थिएटर के दौरान ही इनका ज्यादा होता था। दवा व्यापारी बताते हैं कोरोना वायरस के चलते इनकी बिक्री 95 गुना तक बढ़ गई। यहां तक कि सभी स्टोर और निर्माता कंपनियों के यहां स्टाक भी खत्म हो गया। कालाबाजारी पर पांच मेडिकल स्टोर सील भी किए गए।
एसिडिटी की दवा की दोगनी रही मांग
लॉकडाउन में लोग घरों में रहे और जमकर पसंदीदा खाना खाया। व्यायाम भी नहीं किया, जिससे एसिडिटी की परेशानी बढ़ गई। इसके चलते एसिडिटी की दवा की भी खूब मांग रही और बिक्री दो गुनी हो गई। मधुमेह और ब्लडप्रेशर की दवा सामान्य दिनों की तरह ही बिकी। दरअसल, इसके मरीजों ने ही यह दवाएं खरीदी।
सामान्य दिनों की बात करें तो 70 दिन में थोक की दवा का 210 करोड़ रुपये का व्यापार होता है। लेकिन लॉकडाउन से 20 से 25 फीसदी ही व्यापार रह गया।- पुनीत कालरा, आगरा फार्मा एसोसिएशन
लॉकडाउन से दवा व्यापार प्रभावित रहा, चुनिंदा दवाएं ही बिकीं। सर्जिकल आयटम नहीं बिके, मास्क और सैनिटाइजर की बंपर बिक्री हुई है। अब सर्जिकल आयटम की डिमांड आने लगी है। - आशीष शर्मा, अध्यक्ष आगरा महानगर केमिस्ट एसोसिएशन
बीपी, मधुमेह रोगियों की बिक्री सामान्य की तरह रही, लेकिन सबसे ज्यादा जुकाम-खांसी, बुखार की दवा-सीरप और एंटीबायोटिक की बिक्री सामान्य दिनों के मुकाबले तीन गुना तक रही। - आशू शर्मा, अध्यक्ष जिला आगरा महानगर केमिस्ट एसोसिएशन