सोने की चमक के आभूषण जितने लुभाते हैं, उतना ही आकर्षण इसके निवेश में भी होता है। ज्यादा सुरक्षित विकल्प के तौर पर लोग अब डिजिटल सोने में भी पैसे लगाते हैं। इसमें निवेश भी बाजार के भौतिक सोने की तरह ही कर के दायरे में आता है। डिजिटल सोने पर किस तरह और कितना टैक्स देना पड़ता है, पूरी पड़ताल करती प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट-
बाजार भाव पर निर्भर डिजिटल सोना भी
निवेश सलाहकार बलवंत जैन का कहना है कि सोने का भाव भी भौतिक सोने के बाजार पर निर्भर होता है। बाजार में जैसे-जैसे कीमत बढ़ेगी। डिजिटल निवेश पर रिटर्न भी बढ़ता जाएगा। सोना अभी कुछ नीचे आया है लेकिन 2020 में जहां 28 प्रतिशत रिटर्न मिला। वहीं 5 साल में 90 प्रतिशत से ज्यादा रिटर्न दिया है। डिजिटल सोने में निवेश जितना आसान है, उतना ही सुरक्षित भी है।
बेचने पर भी दो तरह से कर भुगतान
डिजिटल सोने को बेचने से हुए मुनाफे पर दो तरह से कर लगता है। अगर निवेश के 3 साल के भीतर बेचा जाता है तो सीधे तौर पर टैक्स देनदारी नहीं बनेगी। इस बिक्री से हुए मुनाफे को अतिरिक्त आय माना जाएगा और कम अवधि का पूंजीगत लाभ (एसटीसीजी) कार्ड देना पड़ेगा। जो ग्राहक के टैक्स स्लैब के बराबर होगा। एक लाख के निवेश पर 30 प्रतिशत लाभ हुआ और 10 प्रतिशत आयकर स्लैब में आता है, तो 30 हजार के मुनाफे पर 3 हजार टैक्स लगेगा। 3 साल के बाद सोना इस पर भी देना होगा।