ट्रंप प्रशासन ने भारतीय आईटी कंपनियों को बड़ा झटका देते एच1बी वीजा का विस्तार देने से मना कर दिया है। इससे इन कंपनियों में काम करने वाले करीब 8742 कर्मचारियों को स्वदेश वापस लौटना पड़ सकता है।
अमेरिकी प्रशासन ने इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी लिमिटेड (टीसीएस), कॉग्निजेंट, विप्रो, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक्नोलॉजी द्वारा दिए गए अपने कर्मचारियों के वीजा को आगे बढ़ाने के करीब दो-तिहाई आवेदन को 2018 में रद्द कर दिया था। कॉग्निजेंट, टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो के करीब 7933 आवेदन रद्द किए गए हैं। कुल 30 आईटी कंपनियों के 13 हजार आवेदन को रद्द कर दिया गया है।
कॉग्निजेंट के 3,548 आवेदन, इंफोसिस के 2,042 आवेदन और टीसीएस के 1744 आवेदन को रद्द किया गया था। इन छह कंपनियों के केवल 16 फीसदी आवेदन को आगे बढ़ाया गया।
हालांकि जो भारतीय आईटी कर्मचारी अमेरिकी कंपनियों जैसे कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और एप्पल में काम करते हैं, उनको एच1बी वीजा के विस्तार आवेदन सबसे ज्यादा स्वीकार किए गए हैं। व्हाइट हाउस को एच-1बी वीजा धारकों के जीवनसाथियों के काम करने के अधिकार को समाप्त करने के लिए मौजूदा नियमों में बदलाव करने का औपचारिक रूप से प्रस्ताव मिला है। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम एच-1बी वीजाधारकों के 90,000 से अधिक जीवनसाथियों को प्रभावित करेगा। इनमें बड़ी संख्या भारतीयों की है।
व्हाइट हाउस अंतिम निर्णय लेने से पहले प्रस्तावित विनियमन की समीक्षा करेगा। इसके लिए वह विभिन्न एजेंसियों से इस संबंध में राय ले सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ हफ्तों से लेकर कई महीनों तक का समय लग सकता है।इस कार्यक्रम का प्रबंधन करने वाली अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने कहा कि समीक्षा और टिप्पणी की प्रक्रिया पूरी होने तक प्रस्तावित विनियमन अंतिम रूप नहीं ले सकता।