सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के विनिवेश के लिए बोली मंगाने की समयसीमा को 30 जून से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया है। एयर इंडिया के लिए सभी नीलामीकर्ता बोली 31 अगस्त तक शाम पांच बजे तक जमा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त सरकार ने बिल्डर्स को अपनी बिल वापस लेने की तारीख को 14 जुलाई से बढ़ाकर 14 सितंबर 2020 कर दी है।
कोविड-19 महामारी के कारण दुनिया भर में आर्थिक गतिविधियां रुक गई हैं, जिसको देखते हुए यह फैसला किया गया है। घाटे में चल रही राष्ट्रीय एयरलाइन एयर इंडिया को बेचने का एक और प्रयास करते हुए सरकार ने इस साल जनवरी में विमानन कंपनी के लिए रुचि पत्र (ईओआई) मांगे थे।
एयर इंडिया के विनिवेश को लेकर सरकार ने इस कंपनी के कर्मचारियों को आश्वासन दिया था कि उनके हितों की पूरी रक्षा की जाएगी। सरकार ने कहा था की खरीददार के साथ समझौते में इस बात को भी रखा जाएगा कि एयर इंडिया के बिक जाने के बाद निजी कंपनी किसी कर्मचारी को सेवाकाल पूरा होने तक नहीं निकालेगी।
अनिश्चित नजर आ रही है विनिवेश प्रक्रिया: क्रिसिल
पिछले महीने रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा था कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया काफी अनिश्चित नजर आ रही है। क्रिसिल ने कहा कि इस महामारी की वजह से वैश्विक स्तर पर विमानन क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। क्रिसिल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी के निदेशक एवं प्रैक्टिस लीडर (परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स) जगननारायण पद्मनाभन ने कहा कि, 'एक जानी-मानी एयरलाइन एयर इंडिया के लिए बोली लगाने वालों को जैसी प्रतिबद्धता जताने की जरूरत है, मौजूदा माहौल में ऐसा हो पाना अनिश्चित है।'
पिछले वित्तीय वर्ष हुआ था इतना घाटा
नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि, 'वित्त वर्ष 2018-19 के ऑडिट अकाउंट के अनुसार, एयर इंडिया का समेकित घाटा 62,614 करोड़ रुपये था।' उन्होंने कहा कि ब्याज के अत्यधिक भार, प्रतिस्पर्धा, भारतीय रुपये के कमजोर होने तथा कुछ अन्य कारणों से एयर इंडिया को नुकसान हुआ है। मंत्री ने कहा कि नुकसान के बावजूद एयर इंडिया सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम तेल कंपनियों को भुगतान करती आ रही है।
वहीं पिछले सप्ताह उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि इंडियन एविएशन दिवाली से लेकर इस साल के अंत तक कोरोना काल के पहले के स्तर तक पहुंच जाएगा। एयर इंडिया के विनिवेश को लेकर उन्होंने कहा कि वे इसे लेकर आशावादी हैं।