दो माह से जारी टाटा समूह में कुर्सी की लड़ाई से सायरस मिस्त्री ने एक बात साफ कर दी है कि गुड गवर्नेंस और रेपुटेशन कंपनी के लिए कितना महत्व रखती है। सायरस ने टाटा ग्रुप की सभी कंपनियों के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन इससे कंपनी की साख पर अच्छा खासा असर पड़ा है।
रतन टाटा और सायरस मिस्ट्री के बीच जारी वाकयुद्ध ये दर्शाता है कि कंपनी गवर्नेंस में सुधार की जरूरत है। खासकर टाटा ग्रुप की अनलिस्टेड कंपनियों और उसको चलाने वाले ट्रस्ट में। पिछले दिनों एक तिहाई शेयरहोल्डर्स ने वोट देकर सायरस को बोर्ड से हटाने पर मुहर लगायी थी।
इस घटनाक्रम में टाटा की सभी लिस्टेड कंपनियों की कुल वैल्यू में करीब 10 बिलियन डॉलर की कमी देखी गई। बाजार में लिस्टेड कंपनियों की बात की जाए तो अगर टाटा की टीसीएस की बात छोड़ दी जाए जहां पहले से ही गिरावट जारी है तो बाकी सभी शेयरों में बाजार में हो रही गिरावट से दुगनी गिरावट देखी जा रही है। गौरतलब है कि टाटा ग्रुप के बोर्ड ने 24 नवंबर को वोट करके सायरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटा दिया था।