पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने पीएसीएल लिमिटेड (पहले की पर्ल एग्रोटेक कारपोरेशन लि.) पर अब तक सबसे बड़ा, 7,269.5 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका है।
सेबी ने कहा है कि इस कंपनी ने जनता के साथ धोखा किया है इसलिए इस पर इतना ज्यादा जुर्माने की गुंजाइश बनती है। सेबी के 42 पन्ने के एक आदेश के मुताबिक पीएसीएल ने अवैध तरीके से जनता से भारी रकम जुटाई थी तो एक साल से कम अवधि में ही इसने 2,423 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा अर्जित किया।
सेबी ने कहा है कि सभी तथ्यों एवं परिस्थितियों पर गौर करने के बाद सेबी ने पीएसीएल पर अब तक का सर्वाधिक जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है।
उल्लेखनीय है कि एक साल पहले ही सेबी ने पीएसीएल को जनता से जमा किए गए 49,100 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया था। सेबी की जांच से स्पष्ट हुआ है कि पीएसीएल और इसके चार निदेशकों तरलोचन सिंह, सुखदेव सिंह, गुरमीत सिंह एवं सुब्रत भट्टाचार्य ने आम जनता से पैसे जुटाये, वह भी भ्रामक निवेश योजनाओं के जरिये।
यही नहीं, लोगों से कृषि भूमि की खरीद और उसके विकास के नाम पर भी पैसे बटोरे गए। गैरकानूनी रूप से निवेशकों से धन जमा करने के मामले में अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना लगाने का कारण बताते हुए सेबी ने कहा है कि इस तरह से बड़े पैमाने पर कंपनी ने जो आम जनता को ठगा है, इस तरह का उदाहरण अन्यत्र नहीं मिलता। इसलिए कंपनी पर इतना बड़ा जुर्माना लगाया गया है।
पूंजी बाजार नियामक का कहना है कि इस तरह की ठगी के मामले आमतौर पर नहीं दिखते जिसमें अवैध तरीके से योजनाएं चला कर जनता को भरमाया गया है। इस लुभावने ऑफर को देख कर लोगों ने अपने खून-पसीने की गाढ़ी कमाई कंपनी को सौंप दी। अंतत: निवेशक ठगे गए।