सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन इंडिगो के प्रवर्तकों में बढ़ते विवाद के बीच कॉरपोरेट मंत्रालय और बाजार नियामक सेबी ने कंपनी संचालन की खामियों व अन्य उल्लंघन के आरोपों की जांच तेज कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि प्रवर्तकों में एक राकेश गंगवाल ने संचालन खामियों का आरोप लगा सेबी से दखल देने की मांग की थी।
जांच के दायरे में इंडिगो की मूल कंपनी
मामले से जुड़े अधिकारियों ने रविवार को बताया कि इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो की मूल कंपनी) नियामकीय जांच के दायरे में है ओर सेबी को नियमों के उल्लंघन के संकेत मिले हैं। कंपनी संचालन में खामी, निष्पक्ष व्यवसाय के नियमों और भेदिया कारोबार रोधी नियमों के उल्लंघन के आरोपों का सामना कर रही है। लिहाजा कंपनी प्रवर्तकों से जुड़ी इकाईयों और निदेशक मंडल के सदस्यों से जुड़ी हरेक इकाईयों की जांच की जा रही है। मंत्रालय इस बात की जांच करेगा कि ज्ञापन, लेख, समझौते और समाधान कंपनी अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप हैं या नहीं। यदि कंपनी अधिनियम का उल्लंघन किया गया होगा तो उसे कड़ी नियामकीय कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इसमें मौजूदा समझौतों को समाप्त कर नई व्यवस्था देना भी शामिल है। फिलहाल मंत्रालय और सेबी ने 19 जुलाई तक जवाब मांगा है।
गंगवाल ने कारोबार बेचने का प्रयास किया : भाटिया
कंपनी के दूसरे प्रवर्तक राहुल भाटिया समूह का कहना है कि राकेश गंगवाल ने अपने वित्तीय जोखिमों को सीमित कर दिया था। साथ ही कंपनी संचालन में अप्रत्याशित विवाद पैदा करने के लिए कपट का सहारा लिया। जब भी कंपनी को जरूरत थी, वह उपलब्ध नहीं हुए और उन्होंने कारोबार को बेचने का भी प्रयास किया। बता दें कि इंडिगो में 37 फीसदी हिस्सेदारी राकेश गंगवाल की है जबकि राहुल भाटिया समूह की 38 फीसदी हिस्सेदारी है।