बाजार नियामक सेबी को सोमवार को झटका लगा है। सैट ने 7,800 करोड़ रुपये के सत्यम घोटाला मामले में ग्लोबल ऑडिटिंग कंपनी प्राइस वाटरहाउस कूपर्स (PWC) पर दो साल के लिए लगाई गई रोक के आदेश को खारिज कर दिया है। सेबी के अनुसार साल 2009 में हुए सत्यम घोटाले में इस कंपनी की भी भूमिका थी, जिसकी वजह से सेबी ने कंपनी को दो साल के लिए बैन कर दिया था।
13 करोड़ रुपये लौटाने को मंजूरी
हालांकि, सैट ने मामले में आडिट कंपनी पीडब्ल्यूसी से आंशिक तौर पर 13 करोड़ रुपये लौटाने को मंजूरी दी है। कंपनी के प्रवर्तक रामलिंग राजू ने करोड़ों रुपये के घोटाले की बात को स्वीकारा था।
प्राइस वाटरहाउस नेटवर्क PWC इंडिया की ऑडिटिंग कंपनी है। कंपनी के दो पार्टनर्स गोपालकृष्णन और श्रीनिवास टल्लूरी पर भी तीन साल के लिए किसी भी लिस्टेड कंपनी को ऑडिट सर्टिफिकेट जारी करने पर बैन लगाया गया था। ये दोनों चार्टेड अकाउंटेंट घोटाला सामने आने के बाद सत्यम का ऑडिट करने के लिए जिम्मेदार थे।
बैन के अतिरिक्त मामले में सेबी ने कंपनी से 13.09 करोड़ रुपये 12 फीसदी ब्याज के साथ देने को कहा था। इस रकम पर 2009 से ब्याज लगाया जाएगा, जिसके बाद यह रकम करीब 14 करोड़ रुपए हो जाएगी।
सैट ने दिया आदेश
इस संदर्भ में सैट ने कहा कि केवल आईसीएआई ही अपने सदस्यों के मामले में कोई कार्रवाई कर सकता है। सैट ने अपने आदेश में कहा कि, 'सेबी को ऑडिट की गुणवत्ता को देखने और जांचने का कोई अधिकार नहीं है। सेबी इस मामले में केवल उपचारात्मक और बचाव वाली कार्रवाई कर सकता है। उसका निर्देश न तो उपचारात्मक है और न ही बचाव वाला बल्कि उसने दंडात्मक कार्रवाई की है।' हालांकि, सैट ने कहा कि काम ठीक से नहीं करने को लेकर पीडब्ल्यूसी को दी गई 13 करोड़ रुपये की फीस को ब्याज सहित वापस लिया जा सकता है।