सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 58.1% बढ़कर 6,143.88 करोड़ रुपये हो गया है। यह पिछले साढ़े चार साल के दौरान किसी भी तिमाही में कंपनी को हुआ सर्वाधिक मुनाफा है।
कंपनी ने जारी बयान में कहा कि पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में उसका शुद्ध लाभ 3,884.73 करोड़ रुपये रहा था।
अभी तक का सबसे अधिक मुनाफा
कंपनी ने कहा कि यह दिसंबर 2013 की तिमाही में हुए 7,126 करोड़ रुपये के मुनाफे के बाद किसी तिमाही का सबसे अधिक मुनाफा है। तेल एवं गैस की कीमतों में हुई तेज वृद्धि के कारण उसका वित्तीय प्रदर्शन बेहतर रहा है।
शेयर बाजार को भेजी जानकारी के अनुसार आलोच्य अवधि में कंपनी की परिचालन से आय 42.7 प्रतिशत बढ़कर 27,212.83 करोड़ रुपये रही जो 2017-18 की इसी अवधि में 19,073.54 करोड़ रुपये थी।
देश की सबसे बड़ी तेल एवं गैस उत्पादक कंपनी ने कहा कि उसने सेवा कर और जीएसटी का 2,695 करोड़ रुपये विरोध दर्ज कराते हुये जमा किया है। उसका मानना है कि उसके द्वारा सरकार को दी गई रॉयल्टी पर यह कर लागू नहीं होना चाहिये।
ओएनजीसी जैसी तेल उत्पादक कंपनियों को जमीन पर स्थित कुओं से कच्चे तेल के उत्पादन पर 12.5 प्रतिशत की दर से राज्य सरकारों को रॉयल्टी देनी होती है जबकि तटीय इलाकों से होने वाले उत्पादन पर केन्द्र सरकार को 10 प्रतिशत दर से रॉयल्टी का भुगतान करना होता है। इन रायल्टी के भुगतान पर कर विभाग सेवा कर की मांग करता है।
ओएनजदीसी ने कहा कि आलोच्य तिमाही के दौरान उसे कच्चे तेल के लिये प्रति बैरल 71.48 डालर का दाम मिला है जो कि एक साल पहले इसी अवधि में मिले 48.42 डालर प्रति बैरल के भाव से 47.6 प्रतिशत अधिक रहा।
प्राकृतिक गैस का दाम भी एक साल पहले के 2.48 डालर से बढ़कर 30 जून 2018 को समाप्त तिमाही में 3.06 डालर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट हो गया। हालांकि, अप्रैल से जून 2018 अवधि में ओएनजीसी का कच्चे तेल का उत्पादन 5.3 प्रतिशत घटकर 50 लाख टन रह गया। संयुक्त तेल क्षेत्रों से ढाई प्रतिशत वृद्धि हासिल कर इस कमी को काफी कुछ पूरा कर लिया गया।