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लिस्टिंग के बाद भी LIC में सरकार रखेगी प्रबंधन नियंत्रण: निर्मला सीतारमण

Wed, 04 Mar 2020 05:32 PM IST
‌डिंपल अलवधी पीटीआई, नई दिल्ली
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सरकार ने मंगलवार को कहा कि प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के जरिए भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद भी पॉलिसी धारकों के हितों की सुरक्षा के लिए वह इसके प्रबंधन नियंत्रण को अपने पास बरकरार रखेगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी जानकारी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार कानूनी बदलाव और विनियामक की अनुमति के बाद आईपीओ लाएगी। उन्होंने कहा, 'सरकार प्रमुख शेयरधारक बनी रहेगी और प्रबंधन नियंत्रण उसके पास बना रहेगा ताकि पॉलिसी धारकों का हित संरक्षित हो सके।'

एलआईसी का बाजार हिस्सा नहीं हो रहा कम

वित्त मंत्री ने कहा कि स्टॉक एक्सचेंजों में कंपनियों को सूचीबद्ध करना कंपनी को अनुशासित करता है और वित्तीय बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराता है। साथ ही यह खुदरा निवेशकों को इस प्रकार सृजित संपदा में भागीदारी के लिए अवसर प्रदान करता है। उन्होंने इस बात को गलत बताया कि एलआईसी का बाजार हिस्सा कम हो रहा है। 

इतना है कंपनी एलआईसी का बाजार हिस्सा

वित्त मंत्री ने बताया कि 31 मार्च 2019 को पॉलिसियों की संख्या के आधार पर एलआईसी का बाजार हिस्सा 74.71 फीसदी था जो 31 जनवरी 2020 को बढ़कर 77.61 फीसदी हो गया। इस अवधि में प्रथम वर्ष प्रीमियम की आय 66.24 फीसदी से बढ़कर 70.02 फीसदी हो गई। वित्त मंत्री ने 2020-21 के आम बजट भाषण में सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाले एलआईसी को सूचीबद्ध कराने की घोषणा की थी।

LIC में सरकार की 100 फीसदी हिस्सेदारी

मौजूदा समय में एलआईसी में सरकार की 100 फीसदी हिस्सेदारी है। फिच ने कहा है कि सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध एलआईसी को अधिक कड़े खुलासा नियमों को पूरा करना होगा। इससे कंपनी के भीतर ही अनुपालन और जवाबदेही की मजबूत संस्कृति बनेगी। विश्लेषकों को एलआईसी का वैल्यूएशन आठ से 10 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। 

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बैंकों के विलय की प्रक्रिया जारी, एक अप्रैल से होगी प्रभावी: सीतारमण

वहीं, निर्मला सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने का काम जारी है। उन्होंने कहा कि विलय एक अप्रैल 2020 से प्रभाव में आ जाएगा।
सीतारमण ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विलय प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और सरकार संबंधित बैंकों के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई नियामकीय मुद्दा नहीं होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंक विलय का काम पटरी पर है और संबंधित बैंकों के निदेशक मंडल पहले ही निर्णय कर चुके हैं। 

सरकार ने पिछले साल अगस्त में बड़ा फैसला लेते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों का विलय कर चार बैंक बनाने की घोषणा की। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या घटकर 12 पर आ गयी जो 2017 में 27 थी।
 

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