12,778 करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज में डूबे फ्यूचर ग्रुप के रिलायंस ने 24,713 करोड़ रुपये में खरीद लिया है। रिटेल किंग के नाम से मशहूर किशोर बियानी या उनके परिवार का कोई भी सदस्य अब 15 साल तक रिटेल कारोबार में नहीं आ सकता। यानी अब उन्हें नए सिरे से कारोबार शुरू करना होगा। डील में बिग बाजार, एफबीबी, फूडहॉल, ईजीडे, सेंट्रल, ब्रैंड फैक्टरी और नीलगिरिज शामिल है। फोर्ब्स के अनुसार, 2019 तक वे 13 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक थे।
बढ़ता गया फ्यूचर ग्रुप का कर्ज
साल 2008 में वैश्विक मंदी के बाद फ्यूचर ग्रुप का कर्ज बढ़ता गया और 2009 में उन्होंने मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी मैकेंजी की सेवाएं ली। इसके बाद साल 2012 में उन्होंने पेंटालून के अधिकांश शेयर आदित्य बिड़ला नुवा को बेच दिए। यह डील 1,600 करोड़ रुपये में हुई थी, जिसमें 800 करोड़ रुपये का कर्ज शामिल था। अमेजन को उन्होंने फ्यूचर कूपंस की 49 फीसदी हिस्सेदारी बेची और फिर अमेरिकी कंपनी वारबर्ग पिंकस को उन्होंने फ्यूचर कैपिटल होल्डिंग के अधिकांश शेयर बेचे।
मुनाफे में 15 फीसदी की गिरावट
साल 2019 की समाप्त तिमाही में फ्यूचर रिटेल के मुनाफे में 15 फीसदी की गिरावट आई थी और रेवेन्यू में तीन फीसदी की कमी देखी गई थी। इसके बाद 2020 में कोरोना वायरस महामारी के चलते संकट और गहरा हो गया। कंपनी पर कर्ज का बोझ बढ़ गया, जिसकी वजह से रेटिंग एजेंसियों ने भी रेटिंग घटा दी औक कंपनी के शेयरों में करीब 75 फीसदी तक गिरावट आई।
1987 में की थी कारोबार की शुरुआत
मालूम हो कि 1987 में किशोर बियानी ने कारोबार शुरू किया था। मेंज वियर उनकी पहली कंपनी थी, जिसे बाद में पेंटालून कर दिया गया और साल 1991 में इसो पेंटालून फैशन लिमिटेड कर दिया गया। साल 2001 में किशोर बियानी ने देशभर में बिग बाजार के स्टोर खोले। बियानी मुंबई के एचआर कॉलेज के छात्र हैं। उनका सपना हर किसी तक अपने खुद के लेबल के प्रोडक्ट को पहुंचाना था।