कर्ज के बोझ तले दबे होने की वजह से अस्थाई रूप से बंद हुई जेट एयरवेज के लिए रोशनी की किरण दिखाई पड़ी है। दरअसल जेट एयरवेज कर्मचारियों के संघ और एडीआई ग्रुप ने बंद पड़ी एयरलाइंस की 75 फीसदी हिस्सेदारी की बोली लगाने के लिए साझेदारी की घोषणा की है।
जेट एयरवेज के बंद होने से हजारों कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। एयरलाइन का दोबारा संचालन शुरू होने से कर्मचारियों को राहत मिलेगी। यह जेट एयरवेज को खरीदने की अपने तरह की पहली ऐसी पहल है। कर्ज के बोझ से दबी जेट एयरवेज देश की पहली ऐसी विमानन कंपनी है जो एनसीएलटी की प्रक्रिया का सामना कर रही है।
एनसीएलटी में कंपनी के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक ने 26 अन्य ऋणदाताओं की ओर से 20 जून को दिवाला एवं शोधन अक्षमता प्रक्रिया शुरू करने की याचिका दायर की थी। जेट एयरवेज पर बैंकों का करीब 8500 करोड़ रुपया और वेंडरों, पट्टा देने वालों और कर्मचारियों इत्यादि का 25,000 करोड़ रुपया बकाया है।
कर्ज संकट से जूझ रही जेट एयरवेज के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करना कर्जदाता बैंकों की मजबूरी है। जेट एयरवेज के कर्जदाता समूह बैंकों की अगुवाई करने वाले एसबीआई ने शुक्रवार को कहा कि एतिहाद की मांगें पूरी करना हमारे लिए संभव नहीं था। ऐसे में एनसीएलटी जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।