देश की प्रमुख एयरलाइन में शुमार जेट एयरवेज की हालत और पतली हो गई है। कंपनी जहां एक बार फिर कर्मचारियों को सैलरी देने में देरी कर रही है। वहीं इसके चलते कई उड़ानों को भी रद्द करना पड़ा है। वहीं पहली बार कंपनी दिसंबर में अपनी लोन की उधारी को नहीं चुका पाई, जिसके चलते उसकी रेटिंग भी घटा दी गई है।
8 हजार करोड़ से ज्यादा की उधारी
नरेश गोयल के स्वामित्व वाली कंपनी पर फिलहाल 8 हजार करोड़ से ज्यादा की उधारी है। कंपनी को अगले दो साल में 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक चुकाने हैं। रेटिंग एजेंसी इकरा के मुताबिक मार्च तक कंपनी को 1700 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2019-20 में 2444.5 करोड़ रुपये और 2020-21 में 2167.9 करोड़ रुपये की देनदारी बैंकों को चुकानी होगी।
इकरा ने घटाई रेटिंग
इकरा ने कंपनी की रेटिंग को घटाकर के 'डी' से 'सी' कर दिया है। एजेंसी ने कहा है कि जेट लगातार कर्मचारियों को सैलरी भी देरी से दे रही है। वित्तीय संकट से जूझ रही इस निजी एयरलाइन कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट आई है। यह एक संपूर्ण सेवा विमानन कंपनी है। इसका शेयर दो जुलाई के बाद से 12 प्रतिशत टूट चुका है।
सितंबर तक कंपनी को लगातार दो तिमाही में नुकसान हुआ था। कंपनी में संयुक्त अरब अमीरात की राष्ट्रीय विमानन कंपनी एतिहाद की 24 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी को चालू वर्ष की मार्च तिमाही में 1,036 करोड़ रुपये का घाटा हुआ जो जून तिमाही में बढ़कर 1,300 करोड़ रुपये पहुंच गया।