बंद हो चुकी जेट एयरवेज की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब कंपनी के ऊपर दिवालिया कोर्ट में केस दाखिल हो सकता है। जेट एयरवेज को अपनी सेवाएं देने वाली एक कंपनी ने 10 दिन के अंदर बकाया न मिलने पर यह कदम उठाने का संकेत दिया है।
जेट एयरवेज को थमाया नोटिस
राजन राकेश एंड ब्रदर्स नाम की कंपनी ने जेट एयरवेज को 15 अप्रैल को नोटिस थमाते हुए कहा है कि वो 2 जनवरी से बकाया 25.68 लाख रुपये को जमा करे, नहीं तो उसके ऊपर दिवालिया कोर्ट में कार्यवाही की जाएगी।
बैंकों को लग सकता है झटका
एसबीआई की अगुवाई वाले बैंकों को झटका लग सकता है, अगर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने राजन राकेश एंड ब्रदर्स की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। ऐसा इसलिए क्योंकि बैंक भी फिलहाल नए निवेशक की प्रक्रिया को पूरा करने में लगे हुए हैं।
पहले भरना होगा बकाया पैसा
अगर एनसीएलटी में सुनवाई होती है तो फिर बैंकों को सबसे पहले जेट एयरवेज के सभी बकाएदारों का पैसा देना होगा। अगर दिवालिया प्रक्रिया शुरू होती है तो फिर अभी तक चल रहे नए निवेशक को चुनने के प्रोसेस में 180 से 270 दिनों की देरी हो सकती है।
फिर नहीं शुरू हो पाएगी जेट एयरवेज
एक बार दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने के बाद जेट एयरवेज को फिर से चालू करने में काफी देरी हो सकती है। इससे जिन निवेशकों ने फिलहाल बैंक के पास निविदाएं जमा की है, वो आगे चलकर के इस प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं। इससे बैंकों को भी अपना 8000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज वापस पाने में दिक्कतें होंगी।
इन कंपनियों ने जमा की हैं निविदाएं
फिलहाल जेट एयरवेज को दोबारा से शुरू करने के लिए एतिहाद एयरवेज, नेशनल इनवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ), प्राइवेट इक्विटी निवेशक टीपीजी कैपिटल और इंडिगो पार्टनर्स ने निविदाएं जमा की हैं। इस पर बैंक 10 मई तक फैसला लेगी।