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कर्ज के बोझ तले दबी बिजली कंपनियों पर होगी दिवालिया की कार्रवाई, संपत्ति हो सकती है सीज

Tue, 28 Aug 2018 11:02 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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भारी कर्ज से जूझ रही 70 निजी बिजली उत्पादन कंपनियों से कर्ज वसूली को लेकर रिजर्व बैंक द्वारा जारी सर्कुलर पर हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इंकार कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार की हाई पावर कमेटी को निर्देश दिया है कि वह कंपनियों की दशा सुधारने के लिए उसके समक्ष लंबित संसदीय कमेटी की रिपोर्ट पर दो माह में रिपोर्ट पेश करे। कोर्ट ने कंपनियों को इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की धारा सात और बैंकिग रेग्युलेशन एक्ट की धारा 35 ए के तहत कार्यवाही करने की छूट दी है।

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प्रयागराज पावर जनरेशन कंपनी सहित बिजली उत्पादन कंपनियों की एसोसिएशन की ओर से दाखिल याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने सुनवाई की। कंपनियों ने आरबीआई के सर्कुलर को चुनौती दी थी।

आरबीआई ने सर्कुलर जारी कर सभी बैंकों को पुनर्गठन का निर्देश दिया है। इसके तहत बैंक 200 करोड़ रुपये से अधिक बकाया वाली कंपनियों से वसूली की कार्यवाही करेंगे। कंपनियों पर 14 हजार करोड़ रुपये बैंकों का कर्ज बकाया है। इसके लिए आरबीआई द्वारा दी गई 27 अगस्त तक की समयसीमा सोमवार को समाप्त हो गई है।
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28 अगस्त से बैंक कार्यवाही प्रारंभ कर देंगे। कंपनियों का कहना है कि रेलवे और एनटीपीसी से उनको भुगतान नहीं मिल पा रहा है, इसलिए बैंक लोन की अदायगी नहीं हो पा रही है। संसदीय कमेटी ने कंपनियों को एनपीए से उबारने के लिए सुझाव दिए हैं, जिस पर प्रधानमंत्री कार्यालय की हाई पावर कमेटी विचार कर रही है।

तब तक आरबीआई के सर्कुलर पर रोक लगाने की मांग की गई थी। आरबीआई के अधिवक्ता का कहना था कि बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट की धारा 35 ए के तहत कार्यवाही करने से कंपनियों को 60 दिन का अतिरिक्त समय मिल जाएगा। सर्कुलर पर रोक लगाना उचित नहीं है, क्योंकि लोन अदा न होने से बैंकों की हालत खस्ता है। देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।

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