देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी इंफोसिस और अमेरिकी इन्वेस्टमेंट फर्म वैंगार्ड (Vanguard) के बीच 1.5 अरब डॉलर की डील हुई है। ये इंफोसिस का अब तक का सबसे बड़ा सौदा हो सकता है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, अमेरिकी निवेश फर्म के साथ अनुबंध 10 वर्षों में होने की उम्मीद है और सौदा मूल्य दो अरब डॉलर से ज्यादा बढ़ भी सकता है। साल 2018 में इंफोसिस ने वेरिजॉन (Verizon) के साथ एक समझौता किया था जिसकी कीमत 2019 में एक अरब डॉलर तक बढ़ गई थी।
कंपनी ने अप्रैल-जून तिमाही में 1.7 अरब डॉलर के सौदे जीते, लेकिन इंफोसिस ने कहा कि इसमें वैंगार्ड के साथ हुआ सौदा शामिल नहीं था।
भारतीय आईटी प्रमुख सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म्स, प्रशासन और संबद्ध प्रक्रियाओं सहित वैंगार्ड के व्यवसाय की सहायता करेगा। वैंगार्ड इंफोसिस में एक निवेशक भी है। सौदे की घोषणा के बाद पिछले सप्ताह, इंफोसिस के शेयरों में वृद्धि देखी गई थी।
4233 करोड़ रुपये रहा इंफोसिस का शुद्ध लाभ
इंफोसिस ने पिछले सप्ताह जून तिमाही के नतीजे घोषित किए थे। इस दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ 4233 करोड़ रुपये रहा। जबकि पिछले साल की कमान तिमाही में यह आंकड़ा 3798 करोड़ रुपये था। समेकित शुद्ध लाभ में 11.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
परिचालन से राजस्व 1.7 फीसदी बढ़कर 23,665 करोड़ रुपये हो गया। वहीं तिमाही-दर-तिमाही डॉलर का राजस्व 2.4 फीसदी गिरकर 3,121 मिलियन डॉलर रहा।
सीईओ सलील पारेख ने दिया बयान
तिमाही के दौरान मुद्रा राजस्व क्रमिक आधार पर दो फीसदी गिर गया। इस संदर्भ में कंपनी के सीईओ और एमडी सलील पारेख ने कहा कि, 'हमारे Q1 के परिणाम, ग्राहकों की व्यावसायिक प्राथमिकताओं की गहरी समझ के लिए एक स्पष्ट गवाही है। साथ ही यह इस अवधि के दौरान हमारे कर्मचारियों और नेतृत्व के उल्लेखनीय समर्पण को भी प्रदर्शित करता है।'