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खराब दवाई बेचने पर कंपनियां होंगी जवाबदेह, कानून में जल्द होगा संशोधन

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 23 Nov 2017 12:46 PM IST
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online medicine - फोटो : FILE PHOTO
अब से खराब दवा और अन्य स्वास्थ्य उपकरण बेचने पर दवा कंपनियों पर सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय नकेल कसने जा रही है। इसके लिए कानून में संशोधन किया जाएगा। अभी तक केवल उपचार के दौरान गड़बड़ी होने पर ही कंपनियां मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी होती थी। 

खराब दवा, उपकरणों पर नहीं तय थी जवाबदेही
इससे पहले खराब दवा या फिर उपकरणों के बेचने पर कंपनियों पर किसी प्रकार की कोई जवाबदेही तय नहीं थी। कई बार ऐसी दवाओं के वितरण से लोगों की जान भी चली गई है। सेंट्रल ड्रग स्टैण्डर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएसओ) ने 1940 में बने ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट में बदलाव करने के लिए सरकार को सुझाव दिया है। 


मरीज पर पड़ा असर तो भी देना होगा मुआवजा
लाइवमिंट के मुताबिक, सीडीएसओ ने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि अभी तक एप्रूव दवाइयां लेने पर अगर मरीज की तबीयत बिगड़ती है, तो उस पर दवा कंपनियों पर किसी तरह की कोई उत्तरदायित्व नहीं था। अभी भारत में केवल ऐसे केस में मुआवजा मिलता है, जिसकी तबीयत अस्पताल में इलाज के दौरान बिगड़ती थी। ये हाल सर्जरी में प्रयोग होने वाले उपकरणों पर भी लागू होता था। 
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online medicine - फोटो : FILE PHOTO
अब से खराब दवा और अन्य स्वास्थ्य उपकरण बेचने पर दवा कंपनियों पर सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय नकेल कसने जा रही है। इसके लिए कानून में संशोधन किया जाएगा। अभी तक केवल उपचार के दौरान गड़बड़ी होने पर ही कंपनियां मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी होती थी। 

खराब दवा, उपकरणों पर नहीं तय थी जवाबदेही
इससे पहले खराब दवा या फिर उपकरणों के बेचने पर कंपनियों पर किसी प्रकार की कोई जवाबदेही तय नहीं थी। कई बार ऐसी दवाओं के वितरण से लोगों की जान भी चली गई है। सेंट्रल ड्रग स्टैण्डर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएसओ) ने 1940 में बने ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट में बदलाव करने के लिए सरकार को सुझाव दिया है। 

मरीज पर पड़ा असर तो भी देना होगा मुआवजा
लाइवमिंट के मुताबिक, सीडीएसओ ने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि अभी तक एप्रूव दवाइयां लेने पर अगर मरीज की तबीयत बिगड़ती है, तो उस पर दवा कंपनियों पर किसी तरह की कोई उत्तरदायित्व नहीं था। अभी भारत में केवल ऐसे केस में मुआवजा मिलता है, जिसकी तबीयत अस्पताल में इलाज के दौरान बिगड़ती थी। ये हाल सर्जरी में प्रयोग होने वाले उपकरणों पर भी लागू होता था। 

एक्सपर्ट कमेटी ने की थी जांच

सीडीएसओ की तरफ से गठित की गई एक एक्सपर्ट कमेटी ने अपनी जांच में पाया कि हिप सर्जरी के दौरान एक जानी मानी कंपनी के उपकरण में डिफेक्ट पाया गया, जिसके कारण 22 मरीजों को दुबारा से सर्जरी करानी पड़ी थी।

कमेटी ने कंपनी को सभी 22 मरीजों को 20 लाख रुपये मुआवजा देने के लिए कहा है। अगर कानून में ही इस तरह का संशोधन हो जाए, तो आगे से कोई भी दवा कंपनी लोगों की जिंदगी के साथ ऐसे खिलवाड़ नहीं कर सकेंगी। 

मरीज की सुरक्षा सबसे पहले प्राथमिकता 
सीडीएसओ के इस सुझाव से सरकार के लिए पहली प्राथमिकता मरीज के इलाज के दौरान सुरक्षा देने का है। जिस समय भी यह पता लगेगा कि संबंधित दवा या उपकरण खराब है, उसको तुरंत मार्केट से हटा लिया जाएगा। अगर मरीज ऐसी दवाई को ले भी लेता है, तो भी उसे तुरंत मुआवजा भी मिल सकेगा। इससे सरकार को भी मरीज की सुरक्षा करने में मदद मिलेगी और सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी भी आएगी। 
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