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आईएलएफएसः सरकार ने किया सत्यम जैसा दखल, उदय कोटक बन सकते हैं चेयरमैन

Mon, 01 Oct 2018 05:11 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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भारी कर्ज में डूबी इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएलएंडएफएस) को डूबने से बचाने के लिए केंद्र सरकार आगे आ गई है। सरकार ने राष्ट्रीय कंपनी कानून प्राधिकरण (एनसीएलटी) में अर्जी देकर के कंपनी का प्रबंधन बदलने की मांग की है।

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सरकार उदय कोटक को नॉन एक्जिक्यूटिव चेयरमैन बनाना चाहती है। कुल मिलाकर सरकार आईएलएंडएफएस के लिए वो कदम उठा सकती है जो उसने आईटी कंपनी सत्यम के लिए उठाए थे। आईएलएंडएफएस समूह की कुछ कंपनियों द्वारा किए गए डिफॉल्ट के कारण वित्तीय बाजार में तरलता का भय पैदा हो गया है और नकदी की स्थिति बेहतर करने के लिए आरबीआई ने कुछ कदम भी उठाए हैं।

अधिकारी ने सोमवार को कहा कि कंपनी मामलों के मंत्रालय ने न्यायाधिकरण में याचिका दाखिल की है। आईएलएंडएफएस से जुड़े सूत्रों ने कहा कि कंपनी याचिका को सहयोग कर सकती है, क्योंकि इससे सभी लंबित मुद्दों के समाधान में और सभी शेयरधारकों के लाभ के लिए व्यापक समाधान पर पहुंचने में मदद मिलेगी। आईएलएंडएफएस के प्रमुख शेयरधारकों में हैं एलआईसी, एसबीआई और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया।  
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दरअसल कंपनी पर 91 हजार करोड़ का कर्ज है, जिसे चुकाने में नाकामी की शुरुआत हो चुकी है। ये पैसे बैंकों के हैं। कंपनी में म्युचुअल फंडों का भी पैसा लगा है और पेंशन और प्रोविडेंड फंड का भी पैसा लगा है। आईएलएंडएफएस  पुराने कर्ज चुकाने में बार-बार डिफॉल्ट हो रही है।

कंपनी को अब लोन नहीं मिल सकता और ये बाजार से पैसे जुटाने में भी नाकाम है, क्योंकि इसकी रेटिंग जंक स्टेटस में बदल चुकी है। मसला बड़ा है अगर आईएलएंडएफएस डूबी तो सबकुछ एक झटके में बर्बाद हो जायेगा।

एनसीएलटी ने सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आईएलएंडएफएस में 6 सदस्यों का नया बोर्ड बनेगा। बोर्ड के अध्यक्ष उदय कोटक होंगे।  बोर्ड के सदस्यों में विनित नायर, जी एन वाजपेयी, आईएएस मालिनी शंकर, आईसीआईसीआई बैंक के जी सी चतुर्वेदी और नंद किशोर भी शामिल होगें। 8 अक्टूबर को नए बोर्ड की पहली बैठक होगी।

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