जर्मनी का बढ़ा भारतीय आईटी कंपनियों की ओर आकर्षण
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कोरोना वायरस महामारी का देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। जून तिमाही में जीडीपी में 23.9 फीसदी की गिरावट आई थी। हालांकि विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार आगे इसमें बढ़त की उम्मीद है। इस बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर यह है कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, जर्मनी में भारतीय आईटी कंपनियों की मांग काफी बढ़ गई है। ऐसे में जर्मनी की कई बड़ी कंपनियां पहली बार भारतीय कंपनियों को आउटसोर्सिंग कर रही हैं।
जर्मनी का बढ़ा भारतीय आईटी कंपनियों की ओर आकर्षण
भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अमेरिका तो हमेशा से ही सबसे बड़ा बाजार रहा है, लेकिन अब यूरोपीय देश जर्मनी का भी भारतीय आईटी कंपनियों की ओर आकर्षण बढ़ रहा है। इससे पहले जर्मनी में प्रमुख कंपनियों ने भारत में इतनी बड़ी मात्रा में आउटसोर्सिंग कभी नहीं की थी।
भारतीय आईटी इंडस्ट्री की होगी वृद्धि
दरअसल कोरोना वायरस के चलते इन कंपनियों ने लागत में कटौती की है। इसलिए इन कंपनियों को भारतीय आईटी कंपनियों का रुख करना पड़ा है। भारतीय आईटी कंपनियों को जर्मनी से लगभग 40 से 50 अरब डॉलर यानी करीब तीन से चार लाख करोड़ रुपये की आउटसोर्सिंग की संभावना है। इससे भारतीय आईटी इंडस्ट्री की तेजी से वृद्धि होगी।
इन भारतीय कंपनियों के साथ हुई डील
जिन कंपनियों को जर्मनी से बड़े ऑर्डर मिले हैं उनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इंफोसिस और विप्रो शामिल हैं। पिछले छह महीनों में लगभग 14.7 अरब डॉलर यानी करीब एक लाख करोड़ रुपये की डील साइन की गई हैं। इंफोसिस का डेमलर के साथ सौदा हुआ है, विप्रो का मेट्रो एजी के साथ 5,000 करोड़ रुपये का सौदा हुआ है। टीसीएस ने जर्मनी से 1500 कर्मचारियों के साथ ड्यूश बैंक की आईटी शाखा पोस्टबैंक सिस्टम को टेकओवर किया है।
मालूम हो कि ब्रांड फाइनेंस की रिपोर्ट के अनुसार, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज वैश्विक स्तर पर तीसरी सबसे बड़ी इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आइटी) सर्विस फर्म बन गई है। इस मामले में पहले दो स्थानों पर एसेंचर और आइबीएम के नाम हैं।