फोर्टिस हेल्थकेयर में दो भाईयों के बीच चल रही लड़ाई समाप्त होने की ओर है। कंपनी के पूर्व प्रवर्तक शिवइंदर मोहन सिंह राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में अपने बड़े भाई मालविंदर सिंह तथा रेलिगेयर के पूर्व प्रमुख सुनील गोधवानी के खिलाफ याचिका वापस लेने जा रहे हैं। शिविंदर ने इस बारे में एनसीएलटी में आवेदन किया है।
शिवइंदर ने इससे पहले आरोप लगाया था कि उनके बड़े भाई तथा गोधवानी की गतिविधियों की वजह से कंपनियों तथा उनके शेयरधारकों का हित प्रभावित हुआ है। शिवइंदर मोहन सिंह ने कहा, मैंने एनसीएलटी में याचिका वापस लेने के लिए आवेदन कर दिया है। उन्होंने बताया, मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू की गई है। यदि इससे बात नहीं बनती है तो मेरे पास अपील दोबारा दायर करने का विकल्प होगा।
यह लगाया था आरोप
शिवइंदर ने एनसीएलटी में दाखिल याचिका में आरएचसी होल्डिंग, रेलिगेयर और फोर्टिस में कुप्रबंधन का आरोप लगाया गया है जिसकी वजह से कंपनी, शेयरहोल्डर और कर्मचारियों को नुकसान हुआ। याचिका में रेलीगेयर के पूर्व सीएमडी सुनील गोधवानी को भी प्रतिवादी बनाया है।
बता दें कि फोर्टिस के शेयरधारकों ने पिछले महीने मलेशिया की आईएचएच के साथ 7,100 करोड़ रुपए के सौदे को मंजूरी दी थी। मलेशियाई कंपनी इसमें नियंत्रक हिस्सेदारी लेगी।
अब तक मुंह बंद रखा, अब नहीं रख सकता : शिवइंदर सिंह
शिवइंदर ने लिखा है, "दो दशक से लोग मलविंदर और मुझे एक दूसरे का पर्याय समझते थे। हकीकत यह है कि मैं हमेशा उनका समर्थन करने वाले छोटे भाई की तरह था। मैंने सिर्फ फोर्टिस के लिए काम किया। 2015 में राधास्वामी सत्संग, ब्यास से जुड़ गया। मैं भरोसेमंद हाथों में कंपनी छोड़ गया था।
लेकिन दो साल में ही कंपनी की हालत खराब हो गई। परिवार की प्रतिष्ठा के कारण अब तक चुप रहा। ब्यास से लौटने के बाद कई महीनों से कंपनी संभालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन विफल रहा।"
(इनपुट-पीटीआई)