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BEML में अपनी 28 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकती है केंद्र सरकार, ये है लक्ष्य

Mon, 16 Dec 2019 03:01 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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रणनीतिक विनिवेश के जरिए मोदी सरकार रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) में अपनी 28 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री कर सकती है और 26 फीसदी हिस्सेदारी को सरकार अपने पास बरकरार रख सकती है। वर्तमान में इस कंपनी में सरकार की 54.03 फीसदी हिस्सेदारी है। 

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आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति अक्तूबर 2016 में बीईएमएल लिमिटेड में 26 फीसदी हिस्सेदारी किसी चुनिंदा निवेशक को बेचने की सैद्धांतिक मंजूरी दे चुकी है। 

सरकार ने शुरू किया प्रारंभिक कामकाज 

इस संदर्भ में केंद्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि, 'सरकार रणनीतिक विनिवेश के जरिए कंपनी में अपनी 28 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री करेगी। कंपनी के विभिन्न विभागों को अलग करके नई इकाई बनाने की कोई योजना नहीं है।' साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र ने विनिवेश के लिए प्रारंभिक कामकाज शुरू कर दिया है। 

ये है सरकार का लक्ष्य

बता दें कि 2019-20 के अंतरिम बजट के दौरान, सरकार ने कहा था कि विनिवेश के जरिए उनका 90 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है। लेकिन बाद में सरकार ने इस लक्ष्य को बढ़ाकर 1.05 लाख करोड़ रुपये कर दिया था। 

2018 में जुटाए थे इतने पैसे

केंद्र सरकार ने 2018 में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री करके 84,972 करोड़ रुपये जुटाये हैं। 2018 में हुए बड़े विनिवेश सौदों में ओएनजीसी द्वारा एचपीसीएल का अधिग्रहण, सीपीएसई ईटीएफ, भारत-22 ईटीएफ और कोल इंडिया की हिस्सेदारी बिक्री समेत छह आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) समेत अन्य शामिल हैं। 

इन कंपनियों के निजीकरण को भी मिली मंजूरी

बीपीसीएल में इस समय सरकार की 53.29 फीसदी हिस्सेदारी को बेचा जाएगा और इस कंपनी का प्रबंधकीय नियंत्रण भी खरीदने वाली कंपनी को सौंप दिया जाएगा। कैबिनेट ने शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में भी सरकार की 63.75 फीसदी हिस्सेदारी को बेचने का निर्णय लिया है। जबकि रेलवे की कंपनी कॉनकोर को भी बेचा जाएगा। इसमें सरकार की हिस्सेदारी 54.8 है। इसके अलावा टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और नॉर्थ-ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड की पूरी हिस्सेदारी को एनटीपीसी को बेचा जाएगी। उपरोक्त पांचों कंपनियों का प्रबंधकीय नियंत्रण खरीदने वाली कंपनी को मिलेगा।

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