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कॉल ड्राप पर होगी दो साल की जेल, 10 करोड़ जुर्माना

Fri, 10 Jun 2016 03:53 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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ट्राई ने दिया है सख्त नियमों का प्रस्ताव
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कॉल ड्रॉप होना अब टेलीकॉम कंपनियों के लिए काफी महंगा साबित हो सकता है। कॉल ड्रॉप पर तय नियमों को तोड़ने पर संबंधित टेलीकॉम कंपनियों के अधिकारियों को दो साल की जेल के साथ उन कंपनियों पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना किया जा सकता है। कॉल ड्रॉप पर जुर्माने के प्रावधान पर सुप्रीम कोर्ट में असफल होने के बाद भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) अब नए सिरे से सख्ती की तैयारी कर रहा है। ट्राई ने कॉल ड्रॉप पर लगाम लगाने के लिए सरकार से ज्यादा अधिकार दिए जाने की मांग की है। कॉल ड्रॉप के मामले में शुक्रवार को ट्राई की तरफ से महत्वपूर्ण बैठक भी बुलाई गई है।
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ट्राई ने इस अधिकार को हासिल करने के लिए ट्राई कानून  1997 की धारा 29 में संशोधन का प्रस्ताव किया है। यह धारा ट्राई के निर्देशों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाने से जुड़ी है। ट्राई ने दूरसंचार विभाग से कहा है कि अगर टेलीकॉम कंपनियां इस एक्ट के रेग्युलेशन लाइसेंस के दिशा-निर्देश के खिलाफ काम करती हैं तो ऐसी कंपनियों पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। अभी ट्राई को कॉल ड्रॉप के लिए जिम्मेदार सर्विस कंपनी पर अधिकतम 2 लाख रुपये जुर्माना लगाने का अधिकार है।

पिछले साल अक्तूबर में ट्राई ने कॉल ड्रॉप होने पर टेलीकॉम कंपनियों पर एक रुपये प्रति कॉल ड्रॉप की दर से जुर्माने का प्रावधान किया था जिसे इस साल एक जनवरी से लागू किया जाना था। लेकिन ट्राई के इस प्रावधान को टेलीकॉम कंपनियों ने अदालत में चुनौती दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने ट्राई के प्रावधान को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि ट्राई के पास इस प्रकार का जुर्माना लगाने का अधिकार नहीं है।
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हाल ही में ट्राई ने कॉल ड्रॉप की वास्तविक स्थिति को जानने के लिए कई शहरों में परीक्षण कराया था। लेकिन इस परीक्षण में अधिकतर कंपनियां फेल रही। यह भी पाया गया कि टेलीकॉम कंपनियां कॉल ड्रॉप को छिपाने के लिए रेडियो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है जिससे कॉल ड्रॉप होने के बावजूद उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।

टेलीकॉम कंपनियों की दलील है कि मोबाइल टावर लगाने में होने वाली दिक्कतों की वजह से कॉल ड्रॉप की स्थिति बनी हुई है। हालांकि पिछले आठ-दस महीनों में देश भर में मोबाइल टावर की 90000 साइट्स विकसित करने की बात की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया था मुआवजे का आदेश
टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई ने 16 अक्तूबर, 2015 को आदेश जारी कर टेलीकॉम कंपनियों से कहा था कि कॉल ड्रॉप (बात करते-करते फोन कट जाना) से उपभोक्ताओं को आर्थिक रूप से नुकसान झेलना पड़ता है। इसलिए कंपनियों को कॉल ड्रॉप होने पर एक रुपये उपभोक्ता को बतौर मुआवजा देना होगा, जो एक दिन में अधिकतम तीन रुपये हो सकते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसके इस आदेश को खारिज कर दिया।
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टाइमलाइन
16 अक्तूबर, 2015 : ट्राई ने उपभोक्ताओं के लिए मुआवजे से संबंधित आदेश जारी किया
10 दिसंबर, 2015 : ट्राई के फैसले के खिलाफ टेलीकॉम कंपनियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की
29 फरवरी, 2016 : हाईकोर्ट ने ट्राई के फैसले को सही ठहराते हुए कंपनियों से मुआवजा देने को कहा
टेलीकॉम कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी।
18 मार्च, 2016 : सुप्रीम कोर्ट ने ट्राई से कॉल ड्रॉप के तकनीकी पहलुओं पर विचार करने को कहा
11 मई, 2016 : सुप्रीम कोर्ट ने ट्राई के फैसले पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट के फैसले को भी रद्द कर दिया 
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