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चार साल में 4800 करोड़ से 14 हजार करोड़ तक पहुंचा BSNL का घाटा

Wed, 03 Jul 2019 07:59 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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पिछले चार सालों में भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) का घाटा 4800 करोड़ रुपये से बढ़कर 14 हजार करोड़ के पार चला गया है। वहीं पिछले वित्त वर्ष में कंपनी को 19 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई होने का अनुमान है। इस बात की जानकारी केंद्र सरकार ने खुद लोकसभा में बुधवार को दी। 

सैलरी का सबसे ज्यादा खर्च

संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कंपनी की कमाई का 75 फीसदी हिस्सा केवल कर्मचारियों की सैलरी देने में खर्च हो रहा है। पीएसयू कंपनी को वित्त वर्ष 2015-16 में 4859 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। वहीं 2016-17 में 4793 करोड़ रुपये, 2017-18 में 7993 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। इसके 2018-19 में 14202 करोड़ रुपये होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। 

कमाई में कमी के लिए जियो जिम्मेदार

प्रसाद ने कहा कि कंपनी की 2016 से पहले काफी अच्छी कमाई हो रही थी। लेकिन इसी साल रिलायंस जियो के आने से कंपनी की कमाई में कमी देखने को मिली है। प्रसाद ने कहा कि मोबाइल कंपनियों में प्रतिस्पर्धा, कर्मचारियों की उच्च लागत और 4जी सेवा के न होने से इन दोनों की वित्तीय हालत काफी खराब हो गई है। 

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2016-17 में जहां कमाई 31533 करोड़ रुपये थी, वहीं 2017-18 में यह घटकर 25071 करोड़ रुपये रह गई। पिछले वित्त वर्ष में इसके 19308 करोड़ रुपये रहने की संभावना है। 

सरकार देगी बेलआउट पैकेज

केंद्र सरकार बीएसएनएल के अलावा एमटीएनएल को 74,000 करोड़ रुपये के बेलआउट पैकेज पर विचार कर रही है। बीएसएनएल देश की सबसे ज्यादा घाटे वाली सरकारी कंपनी है, जबकि एमटीएनएल इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर है। लिस्ट में दूसरे स्थान पर एयर इंडिया का नाम है। अगर सरकार इन दोनों टेलीकॉम कंपनी को 74,000 करोड़ रुपये का पैकेज देती है तो यह वित्तीय झटका देने के मामले में एयर इंडिया को पार कर सकती है।

वीआरएस के लिए 8500 करोड़ का प्लान

केंद्र सरकार ने 8500 करोड़ रुपये का प्लान तैयार किया है। इस प्लान के लागू हो जाने के बाद इन दोनों निगमों के कर्मचारी स्वैच्छिक तौर पर सेवा से निवृत हो सकेंगे। 

उम्रदराज कर्मचारियों की होगी छुट्टी

केंद्र सरकार के इस प्लान से इन दोनों निगमों में मौजूद उम्रदराज कर्मचारियों की छुट्टी होने की संभावना है। सरकार के मुताबिक दोनों निगमों में ऐसे कर्मचारियों की संख्या काफी ज्यादा है। इन कर्मचारियों को दी जाने वाली सैलरी के चलते दोनों कंपनियों पर काफी बड़ा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। 

घाटे में चल रही हैं दोनों पीएसयू

दोनों कंपनियां फिलहाल घाटे में चल रही हैं। केंद्र की इस मदद से बीएसएनएल को 6365 करोड़ रुपये और एमटीएनएल को 2120 करोड़ रुपये इस मद के लिए मिलेंगे। इसके एवज में सरकार 10 साल के लिए जारी बांड को गिरवी के तौर पर रखेगी। 

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