फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बॉम्बे डाइंग के अध्यक्ष नुस्ली वाडिया ने रतन टाटा के खिलाफ मानहानि के सभी मामले लिए वापस

Mon, 13 Jan 2020 01:34 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
Ratan Tata
विज्ञापन

बॉम्बे डाइंग के अध्यक्ष नुस्ली वाडिया ने उच्चतम न्यायालय से रतन टाटा व अन्य के खिलाफ 3,000 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति समेत मानहानि के सभी मामले वापस ले लिए हैं। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने दर्ज किया कि रतन टाटा और अन्य का मानहानि का कोई इरादा नहीं था। इसके बाद नुस्ली वाडिया ने याचिका वापस ले ली।

विज्ञापन


प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने वाडिया को शीर्ष अदालत में अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दी। इस संदर्भ में पीठ ने कहा कि, 'टाटा के इस बयान के मद्देनजर कि वाडिया को बदनाम करने की कोई मंशा नहीं थी, जो उच्च न्यायालय के नतीजे के अनुरूप है, याचिकाकर्ता को मौजूदा याचिका और हर्जाने के लिए लंबित वाद वापस लेने की अनुमति दी जाती है।'

यह है मामला

मजिस्ट्रेट अदालत ने दिसंबर 2018 में नुस्ली वाडिया द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के मामले में रतन टाटा और अन्य को नोटिस जारी किया था। टाटा समूह की कंपनियों के निदेशक मंडल से बाहर किए जाने के बाद वाडिया ने यह मामला 2016 में दायर किया था। उसके बाद टाटा व अन्य ने उच्च न्यायालय में संपर्क कर उन लोगों के खिलाफ शुरू की गयी कार्रवाई को खारिज करने का आग्रह किया था।

कोर्ट ने दिसंबर 2018 में जारी किया था नोटिस 

दिसंबर 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने रतन टाटा और अन्य के खिलाफ आपराधिक मानहानि केस में नोटिस जारी किया था। नुस्ली वाडिया ने 2016 में कंपनी से डायरेक्टर पद से बाहर किए जाने पर मामला दर्ज कराया था। इसके जवाब में रतन टाटा और अन्य ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। टाटा और अन्य आठ डायरेक्टरों ने हाई कोर्ट से गुहार लगाई कि उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई को रद्द किया जाएं। इसकी सुनवाई करते हुए जस्टिस रंजीत मोरे और भारती डंगरे की पीठ ने केस रद्द कर दिया।

कॉर्पोरेट विवाद का नतीजा है मानहानि का मामला

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने रतन टाटा का पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया था कि मानहानि का मामला असल में एक कॉर्पोरेट विवाद का नतीजा है। उन्होंने कहा कि पूरा केस बिना दिमाग लगाए दायर किया गया है। 

नुस्ली वाडिया ने कोर्ट को बताया था कि मामला 24 अक्तूबर 2016 को साइरस मिस्त्री को ग्रुप चेयरमैन के पद से हटाने के बाद का है। उन्होंने बताया कि उन्हें षडयंत्र के तहत कंपनी से निकाला गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें