वित्त मंत्रालय ने इंफोसिस की ओर से डिजाइन जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) में 17 खामियां बताई हैं। इन खामियों में जम्मू-कश्मीर में करदाताओं के लेनदेन से जुड़े मुद्दे, आधार सत्यापन और सर्वर से गणना जुड़े मामले शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि जीएसटी परिषद की ओर से जीएसटीआर-3बी दाखिल नहीं करने वाले कारोबारियों का ई-वे बिल ब्लॉक करने की व्यवस्था है। लेकिन सॉफ्टवेयर के जरिए ऐसे कारोबारियों का ई-वे बिल ब्लॉक करने में भी देरी हो रही है।
वित्त मंत्रालय का कहना है कि भारत के बाहर बिक्री के लिए नया आपूर्ति कोड जारी करना होता है। इस सुविधा के लिए कारोबारियों को आवेदन करना होता है, जिसके बाद मंजूरी मिलने पर ही नया आपूर्ति कोड जारी होता है। लेकिन इंफोसिस के डिजाइन सॉफ्टवेयर के जरिए इस प्रक्रिया को पूरा करने में भी दिक्कत आ रही है। रिटर्न दाखिल करने के लिए डिजाइन पोर्टल जीएसटी नेटवर्क को इंफोसिस ने ही बनाया है। कंपनी को इसके लिए 2015 में 1,380 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला था। हालांकि, इंफोसिस ने मामले में टिप्पणी से इनकार कर दिया है।
नीलेकणि को पत्र लिख जताई थी नाराजगी
इससे पहले मंत्रालय ने इंफोसिस चेयरमैन नंदन नीलेकणि को पत्र लिखकर जीएसटी की ‘अनसुलझी’ समस्याओं और दो साल से रिटर्न भरने में आ रही विभिन्न परेशानियों को दूर करने की ‘धीमी’ प्रगति पर नाराजगी जताई थी। साथ ही इंफोसिस से सभी लंबित मुद्दों एवं दैनिक आधार पर आ रही दिक्कतों पर गौर करने और 15 दिन में भविष्य की रुपरेखा के साथ एक त्वरित समाधान योजना पेश करने को कहा है। नीलेकणि को समाधान के साथ 14 मार्च को जीएसटी परिषद के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया है। मंत्रालय ने 5 मार्च को इंफोसिस को पत्र लिखकर कड़े शब्दों में कहा था कि प्रणाली में आ रही कुछ दिक्कतों को 2018 की शुरुआत में ही बता दिया गया था, जिनका अब तक समाधान नहीं हुआ।