एयर इंडिया के पायलट निकायों इंडियन पायलट्स गिल्ड (आईपीजी) और इंडियन कॉमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन (आईसीपीए) ने अपने सदस्यों को एयरलाइन के विनिवेश प्रक्रिया में भाग नहीं लेने की सलाह दी है। दोनों ने कहा कि प्रबंधन ने अभी भी अनुचित वेतन कटौती पर चिताएं दूर नहीं की है।
नीलामी में बोली लगाने की तैयारी कर रहे हैं कर्मचारी
आईपीजी और इंडियन कॉमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन ने संयुक्त संदेश में सदस्यों से कहा कि अन्य विमानन कंपनियों ने पायलटों के वेतन बढ़ा दिया है, लेकिन एयर इंडिया ने अभी तक ऐसा नहीं किया है। यह संदेश ऐसे समय आया है, जब खबरें आ रही हैं कि एयर इंडिया के कर्मचारी एक निजी इक्विटी कंपनी के साथ मिलकर नीलामी में बोली लगाने की तैयारी कर रहे हैं।
14 दिसंबर है बोली लगाने की आखिरी तारीख
इसके लिए कर्मचारियों को एक-एक लाख रुपये देने को कहा गया है। एयर इंडिया और उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी एयर इंडिया एक्सप्रेस की विनिवेश प्रक्रिया इस साल जनवरी में शुरू हुई है। इसके लिए बोली लगाने की आखिरी तारीख 14 दिसंबर है।
31 मार्च 2019 तक एयर इंडिया का कर्ज 58,255 करोड़ रुपये था। बाद में 2019 में, इस ऋण में से 29,464 करोड़ रुपये एयर इंडिया से एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (AIAHL) नामक सरकारी स्वामित्व वाले विशेष प्रयोजन वाहन में स्थानांतरित कर दिया गया था।
पिछले वित्तीय वर्ष हुआ था इतना घाटा
नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि, 'वित्त वर्ष 2018-19 के ऑडिट अकाउंट के अनुसार, एयर इंडिया का समेकित घाटा 62,614 करोड़ रुपये था।' उन्होंने कहा कि ब्याज के अत्यधिक भार, प्रतिस्पर्धा, भारतीय रुपये के कमजोर होने तथा कुछ अन्य कारणों से एयर इंडिया को नुकसान हुआ है। मंत्री ने कहा कि नुकसान के बावजूद एयर इंडिया सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम तेल कंपनियों को भुगतान करती आ रही है।