एयरलाइंस के बीच मची सस्ते टिकटों की होड़ जल्द ही कच्चे तेल की महंगाई की भेंट चढ़ सकती है। रेल किराए और मालभाड़े के बाद हवाई किराए में भी बढ़ोतरी हो सकती है। जिस तरह पिछले एक हफ्ते में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, उसका सीधा असर परिवहन सेवाओं पर पड़ेगा।
गौरतलब है कि घरेलू एयरलाइंस के कुल खर्च में जेट फ्यूल की हिस्सेदारी ४०-४५ फीसदी के बीच होती है। इसलिए जेट फ्यूल के दाम बढऩे पर किसी भी एयरलाइंस के लिए हवाई किराए बढऩे से रोकना मुश्किल हो जाएगा। इस वक्त एक तरफ जहां कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं डॉलर के मुकाबले रुपये में भी कमजोरी देखी जा रही है।
एयरलाइंस का ज्यादातर खर्च डॉलर में होता है, इसलिए उन पर यह दोहरी मार होगी। एविएशन क्षेत्र के विशेषज्ञ अंबर दुबे का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल एविशएन उद्योग के लिए खतरे की घंटी है। एयरलाइंस को हवाई किरायों पर विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
रसोई तक पहुंचेगी महंगाई की आंच
कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों और कमजोर मानसून के बीच महंगाई की आंच रसोई तक पहुंच सकती है। ईंधन के दाम बढऩे से जरूरी वस्तुओं की ढुलाई महंगी होगी। जबकि कमजोर मानसून के चलते कुछ खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। रेलभाडा बढऩे के बाद ट्रकों के किराए भी बढ़ सकते हैं।