कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि उसने स्वआकलन के हिसाब से अब एजीआर बकाए की मूल राशि का पूरा भुगतान कर दिया है। इस भुगतान के साथ ही कंपनी ने अभी तक सरकार को एजीआर बकाए को लेकर 6,854 करोड़ रुपये दिए हैं।
मामले में कंपनी ने कहा कि, ‘‘कंपनी ने आज (सोमवार को) दूरसंचार विभाग को 3,354 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। इस तरह एजीआर बकाये की मूल राशि में बचे हुए का भुगतान हो गया है। कंपनी ने एजीआर बकाये की 6,854 करोड़ रुपये की पूरी मूल राशि का भुगतान कर दिया है।’’
विभाग ने कंपनी से की 53 हजार करोड़ रुपये की मांग
दूरसंचार विभाग ने वोडाफोन आइडिया से एजीआर बकाये को लेकर करीब 53 हजार करोड़ रुपये की मांग की है। इसमें ब्याज, जुर्माना तथा राशि के भुगतान में की गयी देरी पर ब्याज भी शामिल है। कंपनी ने कहा कि वह एजीआर देनदारी के स्वआकलन की रिपोर्ट दूरसंचार विभाग को छह मार्च को सौंप चुकी है।
पहले किया था इतना भुगतान
कंपनी ने इससे पहले एजीआर बकाये को लेकर 17 फरवरी को 2,500 करोड़ रुपये और 20 फरवरी को एक हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
वोडाफोन आइडिया के सीईओ ने वित्त मंत्री से की थी मुलाकात
पहले वोडाफोन आइडिया की प्रमोटर ब्रिटिश कंपनी वोडाफोन के सीईओ निक रीड ने सकल समायोजित राजस्व (एजीआर) मसले पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और संचार मंत्री रविशंकर से मुलाकात की थी। रीड ने मंत्रियों के समक्ष उच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार देय बकाए के भुगतान में कंपनी की असमर्थता प्रकट करते हुए राहत की मांग की थी। वोडाफोन के सीईओ ने कहा कि उनकी कंपनी भारत में नई और अच्छी शुरुआत करना चाहती है।
आईसीयू में है वोडा आइडिया
पिछले माह निक रीड ने कहा था की भारतीय इकाई वोडाफोन आइडिया फिलहाल आईसीयू में है। अगर सरकार से समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के भुगतान में राहत नहीं मिलती है तो फिर इसका असर आगे देखने को मिल सकता है। सेवाओं को बंद भी किया जा सकता है। कंपनी के तीसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा करते हुए निक रीड ने एक प्रेस नोट में यह बात कही थी।