अमेरिकी ऑयल बाजार में कारोबार की शुरुआत 18.27 डॉलर प्रति बैरल से हुई और घटते-घटते पहले एक डॉलर के निम्नतम स्तर पर पहुंच गई और मार्केट बंद होते-होते यह निगेटिव में पहुंच गई। ध्यान देने योग्य बात ये है कि कच्चे तेल का भाव अमेरिका में एक कप कॉफी-बोतलबंद पानी से भी सस्ता हो गया है।
इस गिरावट के मायने यह भी हैं कि अब तेल उत्पादक देशों के सामने स्टोरेज की समस्या खड़ी हो जाएगी। इसे देखते हुए कई तेल फर्म टैंकर किराए पर ले रही हैं ताकि बढ़ा हुआ स्टॉक रखा जा सके। यही वजह है कि वह तमाम देशों से पैसे देकर खरीदने की गुजारिश कर रहे हैं। लॉकडाउन के कारण तेल की खपत भी कम हुई है। इसका असर अमेरिका में तेल कीमतों पर हुआ और वो नेगेटिव यानी जीरो से नीचे चली गईं।