वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण भारत में जरूरी सामानों का उत्पादन करने वाली कंपनियों को छोड़कर बाकी सभी उद्योग बंद है। जिसे लेकर
रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स का कहना है कि इस महामारी को रोकने के लिए देश भर में की गई बंदी का निर्माण कंपनियों पर बुरा असर पड़ेगा और एक महीने के लॉकडाउन से इनका चौथी तिमाही में मुनाफा 8-10 प्रतिशत घट जाएगा।
इंडिया रेटिंग्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हर वित्तीय वर्ष में निर्माण कंपनियों के वार्षिक राजस्व का 30-35 प्रतिशत हिस्सा चौथी तिमाही से आता है, जिसमें एक महीने की बंदी से 8-10 प्रतिशत की कमी आ सकती है।
एजेंसी का मानना है कि मुंबई महानगरीय क्षेत्र, दिल्ली, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में निर्माण गतिविधियों के काफी धीमी गति से आगे बढ़ने का अनुमान है और अप्रैल में इसकी गति और धीमी हो सकती है, या ये पूरी तरह से थम सकती है।
शापूरजी पालोनजी के एक अधिकृत प्रतिनिधि ने बताया, 'कई बड़ी और स्थापित निर्माण कंपनियां कॉरपोरेट दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही हैं। कोरोना संकट निर्माण कंपनियों की आमदनी पर काफी असर डालेगा और लगभग सभी को आने वाले महीनों में भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ेगा।'
एलएंडटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (कॉरपोरेट मानव संसाधन) योगी श्रीराम ने कहा कि कंपनी ने मुंबई में अपने सभी प्रतिष्ठानों पर कामकाज बंद करने का फैसला किया है, हालांकि इसमें आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने वाले प्रतिष्ठान शामिल नहीं हैं।
पीएम मोदी ने की थी लॉकडाउन का पालन करने की अपील
सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी से लॉकडाउन का पालन करने की अपील की थी। दोनों नेताओं ने कहा था कि लोग घरों में ही रहें और सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचें। प्रधानमंत्री ने कहा था कि कोरोना वायरस से खुद और अपने परिवार की रक्षा करें। लॉकडाउन के समय सरकार की तरफ से जारी किए निर्देशों का गंभीरता से पालन करें। प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य सरकारों से भी अपील करते हुए कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था को बनाए रखा जाए।