वास्तविक हालात की बात करें तो वहां के लोग खाने-पीने की चीजों का भंडारण करने लगे हैं। सिर्फ यही नहीं इस महामारी के असर से बाकी दुनिया के देश भी अछूते नहीं रहे हैं। खुद भारत में कॉटन से लेकर ऑटोमोबाइल सेक्टर तक इससे प्रभावित हुए हैं।
चीन में कोरोनावायरस का असर आम लोगों की दिनचर्या पर भी पड़ा है और यह दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। इसकी वजह से लोगों ने रेस्टोरेंट, सिनेमाघर, होटल या अन्य दुकानों में जाना कम कर दिया है। यहां तक कि सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल भी घट गया है।
इसका प्रभाव इन जगहों पर साफ देखा जा सकता है। चीन में नए साल से ठीक पहले कोरोनावायरस का फैलना उद्योग जगत के लिए नुकसान की वजह बन गया है। ऐसे में नए साल की छुट्टियां भी बढ़ा दी गई थीं, जिससे कई उद्योगों में काम शुरू होने में देरी हुई। इससे जरूरी उत्पादन और बिक्री में कमी आई, जिसकी वजह से कुछ हद तक नकदी संकट भी पैदा हुआ है।
चीन में छोटे कारोबारियों की बात करें तो उन पर इस महामारी की सबसे ज्यादा मार पड़ी है। कंपनियों को अपने जरूरी खर्चे जैसे कर्मचारियों के वेतन और बिलों का भुगतान करना पड़ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों की बात करें तो पिछले महीने चीन में खुदरा महंगाई दर 5.4 प्रतिशत थी।
दिसंबर 2019 में यह 4.5 फीसदी थी। महामारी के चलते यह महंगाई दर उम्मीद ज्यादा ऊपर चली गई है। चीन के लिए चिंता की बात यह है कि कोरोनावायरस के फैलने से पहले वह आर्थिक सुस्ती झेल रहा था। अब कोरोनावायरस से लड़ाई उसके लिए एक नई चुनौती की तरह है।
चीन के निर्माताओं को अपने देश में ही नहीं बाहरी दुनिया की तरह से भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। विदेशों में लोग चीन से आयातित चीजें खरीदने से बच रहे हैं। ऐसे में चीन का अंदरूनी और बाहरी दोनों तरह का कारोबार प्रभावित हो रहा है। कई बड़ी कंपनियों मसलन फर्नीचर कंपनी आइकिया, स्टारबक्स ने चीन में अपना ऑपरेशन बंद कर दिया है।
कई एयरलाइन्स ने भी अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं और इंटरनेशनल होटल ग्राहकों का एडवांस लौटा रहे हैं। चीन में बनने वाले कारों के कलपुर्जों की भारत और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में आपूर्ति नहीं हो पा रही है। बता दें कि मोटर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में चीन एक वैश्विक आपूर्तिकर्ता है।
कोरोनावायरस इंसानों के लिए काफी घातक है और कारोबारियों को नुकसान भी पहुंचा रहा है। लेकिन यदि आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो यह भारत के लिए एक खास मौका हो सकता है। क्योंकि चीन में कई चीजों को असेंबल किया जाता है, लेकिन वहां स्थिति में सुधार होने में अभी समय लगने वाला है। ऐसे में भारत असेंबलिंग के क्षेत्र में खुद को एक केंद्र के तौर पर स्थापित कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार चीन के 40 फीसदी उद्योग-कारोबार पर कोरोनावायरस का विपरीत असर पड़ा है।
एअर इंडिया को मिल रहीं बुकिंग
हवाई सेवाएं लेने वाले अधिकांश यात्री चीन से होकर अमेरिका और कनाडा जाने वाली उड़ानों की बुकिंग रद्द करा रहे हैं। चीनी एअरलाइन्स दूसरे देशों की कंपनियों की तुलना में 10-15 फीसदी सस्ती होती थीं, लेकिन अब लोग खासकर अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय देशों के लोग यात्रा करने से बच रहे हैं। लिहाजा चीनी एअरलाइन्स की रद्द हई बुकिंग अब एअर इंडिया को मिल रही हैं।