फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना का कहर: चीन में कारोबार भी बुरी तरह चौपट, पटरी से उतरी आम आदमी की जिंदगी

Fri, 21 Feb 2020 03:33 PM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

चीन के वुहान शहर से पूरी दुनिया में फैल चुके कोरोनावायरस के कहर से सिर्फ आम आदमी की जिंदगी ही पटरी से नहीं उतरी है। बल्कि इसकी वजह से वहां कारोबार भी बुरी तरह से चौपट हुआ है। यही वजह है कि चीन में खुदरा महंगाई दर बीते आठ सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
विज्ञापन
coronavirus - फोटो : PTI
विज्ञापन
वास्तविक हालात की बात करें तो वहां के लोग खाने-पीने की चीजों का भंडारण करने लगे हैं। सिर्फ यही नहीं इस महामारी के असर से बाकी दुनिया के देश भी अछूते नहीं रहे हैं। खुद भारत में कॉटन से लेकर ऑटोमोबाइल सेक्टर तक इससे प्रभावित हुए हैं।

चीन में कोरोनावायरस का असर आम लोगों की दिनचर्या पर भी पड़ा है और यह दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। इसकी वजह से लोगों ने रेस्टोरेंट, सिनेमाघर, होटल या अन्य दुकानों में जाना कम कर दिया है। यहां तक कि सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल भी घट गया है।

इसका प्रभाव इन जगहों पर साफ देखा जा सकता है। चीन में नए साल से ठीक पहले कोरोनावायरस का फैलना उद्योग जगत के लिए नुकसान की वजह बन गया है। ऐसे में नए साल की छुट्टियां भी बढ़ा दी गई थीं, जिससे कई उद्योगों में काम शुरू होने में देरी हुई। इससे जरूरी उत्पादन और बिक्री में कमी आई, जिसकी वजह से कुछ हद तक नकदी संकट भी पैदा हुआ है। 

चीन में छोटे कारोबारियों की बात करें तो उन पर इस महामारी की सबसे ज्यादा मार पड़ी है। कंपनियों को अपने जरूरी खर्चे जैसे कर्मचारियों के वेतन और बिलों का भुगतान करना पड़ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों की बात करें तो पिछले महीने चीन में खुदरा महंगाई दर 5.4 प्रतिशत थी।

दिसंबर 2019 में यह 4.5 फीसदी थी। महामारी के चलते यह महंगाई दर उम्मीद ज्यादा ऊपर चली गई है। चीन के लिए चिंता की बात यह है कि कोरोनावायरस के फैलने से पहले वह आर्थिक सुस्ती झेल रहा था। अब कोरोनावायरस से लड़ाई उसके लिए एक नई चुनौती की तरह है।
विज्ञापन

कोरोनावायरस ने इन उद्योगों की तोड़ी कमर

2 of 5
China CoronaVirus - फोटो : Social Media
  • दवा उद्योग: चीन से कई वस्तुओं के आयात में कमी आई है। भारत में बनाई जाने वाली दवाओं का 80 फीसदी आयात चीन से होता है। वाहन उद्योग के लिए अधिकांश कल-पुर्जे भी चीन से आते हैं। हालांकि भारत में अप्रैल तक का स्टॉक है। इसके अलावा चीन के खिलौनों की कमी दिखेगी।
  • कॉटन उद्योग: भारतीय कॉटन उद्योग भी कोरोनावायरस के कारण प्रभावित हुआ है। इसकी वजह से कॉटन का निर्यात रुक सा गया है। बता दें कि भारत दुनिया में कॉटन का सबसे बड़ा उत्पादक है और चीन प्रमुख आयातक देश है। इस माह चीन को करीब पांच लाख गांठ (एक गांठ में 170 किलो) कॉटन निर्यात की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाने की संभावना जताई जा रही है।
  • सोना महंगा: भारत में सोने की कीमत 42 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई है। इससे फरवरी में सोने की मांग में 20-25 फीसदी (महीने के आधार पर) की कमी आ सकती है। इसके साथ ही सोने की कीमतें और बढ़ने की संभावना है। हालांकि, बाजार में कम मांग रहने से कारोबारियों को 2-3 डॉलर प्रति औंस के डिस्काउंट पर सोना बेचा जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

चीन का सामान खरीदने से बच रही दुनिया

3 of 5
कोरोना वायरस से बचने के लिए मास्क पहना जा रहा है। - फोटो : PTI
चीन के निर्माताओं को अपने देश में ही नहीं बाहरी दुनिया की तरह से भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। विदेशों में लोग चीन से आयातित चीजें खरीदने से बच रहे हैं। ऐसे में चीन का अंदरूनी और बाहरी दोनों तरह का कारोबार प्रभावित हो रहा है। कई बड़ी कंपनियों मसलन फर्नीचर कंपनी आइकिया, स्टारबक्स ने चीन में अपना ऑपरेशन बंद कर दिया है।

कई एयरलाइन्स ने भी अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं और इंटरनेशनल होटल ग्राहकों का एडवांस लौटा रहे हैं। चीन में बनने वाले कारों के कलपुर्जों की भारत और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में आपूर्ति नहीं हो पा रही है। बता दें कि मोटर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में चीन एक वैश्विक आपूर्तिकर्ता है।

भारत को मिल सकता है असेंबलिंग का काम

4 of 5
अफ्रीका में कोरोनावायरस टेस्ट - फोटो : afro.who.int
कोरोनावायरस इंसानों के लिए काफी घातक है और कारोबारियों को नुकसान भी पहुंचा रहा है। लेकिन यदि आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो यह भारत के लिए एक खास मौका हो सकता है। क्योंकि चीन में कई चीजों को असेंबल किया जाता है, लेकिन वहां स्थिति में सुधार होने में अभी समय लगने वाला है। ऐसे में भारत असेंबलिंग के क्षेत्र में खुद को एक केंद्र के तौर पर स्थापित कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार चीन के 40 फीसदी उद्योग-कारोबार पर कोरोनावायरस का विपरीत असर पड़ा है। 

एअर इंडिया को मिल रहीं बुकिंग
हवाई सेवाएं लेने वाले अधिकांश यात्री चीन से होकर अमेरिका और कनाडा जाने वाली उड़ानों की बुकिंग रद्द करा रहे हैं। चीनी एअरलाइन्स दूसरे देशों की कंपनियों की तुलना में 10-15 फीसदी सस्ती होती थीं, लेकिन अब लोग खासकर अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय देशों के लोग यात्रा करने से बच रहे हैं। लिहाजा चीनी एअरलाइन्स की रद्द हई बुकिंग अब एअर इंडिया को मिल रही हैं।
विज्ञापन

कोरोनावायरस का भारत पर क्या प्रभाव

5 of 5
छावला कैंप में महिलाएं - फोटो : pti
  • तेल के कम दाम से फायदा: चीन में कच्चे तेल की मांग कम होने का प्रभाव कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों पर भी पड़ा है। साल 2015 के बाद यह कीमतें सबसे कम हैं। वर्ष 2015 में हमारा आयात बिल कम हो गया था। ठीक वैसी ही स्थिति अभी बन रही है। अप्रैल माह में मिलने जा रहे कच्चे तेल की कीमतें 55 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हो गई हैं। इसमें करीब 10 डॉलर प्रति बैरल की कमी आई है। इससे देश के राजकोष में बचत होगी।
  • मास्क की डिमांड, ऑर्डर मिले: कोरोनावायरस से बचाव के लिए लोग मास्क इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में इसकी मांग भी बढ़ी है। यही वजह है कि चीन में मास्क की कीमत तीन गुना बढ़ गई है। इससे पहले चीन में बने मास्क भारत में आते थे। लेकिन अब इसके उलट चीन में मास्क की कमी हो गई है। इस कारण आज भारत को मास्क बनाने के लिए बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिल रहे हैं। वहीं भारत सरकार ने भी चीन जाने वाले मास्क पर जो प्रतिबंध लगाए थे, वो हटा दिए हैं।
विज्ञापन
Next