सरकार ने दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (आईबीसी) के प्रावधानों को एक साल तक स्थगित कर दिया है। इस दौरान पूंजी संकट से जूझ रही कंपनियों को कर्ज नहीं चुकाने पर दिवालिया मामलों से छूट मिलेगी।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बताया कि पहले डिफॉल्ट की राशि 1 लाख रुपये होती थी, जिसे अब बढ़ाकर न्यूनतम 1 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस कदम से हजारों लघु, सूक्ष्म एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) को दिवालिया प्रावधानों से राहत मिलेगी।
इनमें से अधिकतर कंपनियों का कर्ज 1 करोड़ के दायरे में आता है। इसके अलावा कोरोना के दौर में बैंकों की ओर से जारी आपात कर्ज की राशि को डिफॉल्ट की परिभाषा से बाहर रखा गया है। यानी इस तरह का कर्ज लेने वाली कंपनियों को भुगतान में चूक करने पर दिवालिया कानून का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सरकार ने पहले दिवालिया कानून को 6 महीने तक स्थगित करने की बात कही थी, लेकिन मौजूदा संकट को देखते हुए इस अवधि को बढ़ाकर 1 साल कर दिया गया है।