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सरकार ने इन मामूली गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया

Mon, 18 May 2020 05:04 AM IST
योगेश साहू बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

केंद्र सरकार ने 1 करोड़ तक कर्ज लेने वाली कंपनियों को राहत दी है। कोरोना संकट में लिए गए कर्ज के मामलों को दिवालिया कानून के दायरे से बाहर रखा है। इससे पहले तक आंतरिक तंत्र (आईएएम)  के तहत 18 धाराओं के मामले ही आते थे।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI
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विस्तार
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कंपनियों के कारोबार को आसान बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। वित्तमंत्री ने रविवार को बताया कि अब कंपनियों की छोटी-मोटी चूक को गैर-आपराधिक श्रेणी में रखा जाएगा और इसका निपटारा कंपनी में बनाए गए आंतरिक सहायक तंत्र (आईएएम) के जरिये किया जाएगा।

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सरकार ने इसके लिए कंपनी कानून में बड़ा बदलाव करते हुए क्षम्य अपराध की श्रेणी में शामिल 58 धाराओं को आईएएम के तहत शामिल कर दिया है। अभी तक 18 धाराएं ही आईएएम में शामिल थीं। इस कदम से अदालतों और राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) पर मुकदमों का बोझ कम हो सकेगा। इसके अलावा क्षमा योग्य श्रेणी में आने वाली 7 धाराओं को पूरी खत्म कर दिया है, जबकि 5 को विधेयक के जरिये वैकल्पिक ढांचे में डाल दिया है।

इन गलतियों पर कंपनी को राहत

  • सीएसआर खुलासे में कमी
  • बोर्ड की रिपोर्ट में पर्याप्त जानकारी का अभाव
  • फाइलिंग में डिफॉल्ट करना
  • सालाना बैठक में देरी
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दिवालिया कानून में बदलाव से डिफॉल्ट नहीं होंगी हजारों एमएसएमई

सरकार ने दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (आईबीसी) के प्रावधानों को एक साल तक स्थगित कर दिया है। इस दौरान पूंजी संकट से जूझ रही कंपनियों को कर्ज नहीं चुकाने पर दिवालिया मामलों से छूट मिलेगी।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बताया कि पहले डिफॉल्ट की राशि 1 लाख रुपये होती थी, जिसे अब बढ़ाकर न्यूनतम 1 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस कदम से हजारों लघु, सूक्ष्म एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) को दिवालिया प्रावधानों से राहत मिलेगी।

इनमें से अधिकतर कंपनियों का कर्ज 1 करोड़ के दायरे में आता है। इसके अलावा कोरोना के दौर में बैंकों की ओर से जारी आपात कर्ज की राशि को डिफॉल्ट की परिभाषा से बाहर रखा गया है। यानी इस तरह का कर्ज लेने वाली कंपनियों को भुगतान में चूक करने पर दिवालिया कानून का सामना नहीं करना पड़ेगा।

सरकार ने पहले दिवालिया कानून को 6 महीने तक स्थगित करने की बात कही थी, लेकिन मौजूदा संकट को देखते हुए इस अवधि को बढ़ाकर 1 साल कर दिया गया है।
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