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खुदरा महंगाई में बड़ी गिरावट पर थोक कीमतें बढ़कर नौ महीने के शीर्ष पर

Tue, 15 Dec 2020 01:49 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी खुदरा महंगाई पर असर, फिर भी आरबीआई के लक्ष्य से ज्यादा 
-6.93 फीसदी पर आ गई खुदरा महंगाई 11 फीसदी घटकर
-1.55 फीसदी रही थोक महंगाई नवंबर में, अक्तूबर में 1.48 फीसदी थी
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी से खुदरा महंगाई में नवंबर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, इस दौरान थोक कीमतों पर आधारित (डब्ल्यूपीआई) महंगाई बढ़कर नौ महीने के शीर्ष पर पहुंच गई। इसका प्रमुख कारण विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में तेजी है। 

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सरकार की ओर सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई घटकर 6.93 फीसदी पर आ गई। हालांकि, यह आरबीआई के तय लक्ष्य से ज्यादा है। आलोच्य अवधि में खाद्य कीमतें घटकर 9.43 फीसदी पर आ गईं, जो अक्तूबर में 11 फीसदी पर थीं। उधर, विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में तेजी से थोक महंगाई 1.55 फीसदी बढ़कर नौ महीने के शीर्ष पर पहुंच गई। अक्तूबर, 2020 में यह 1.48 फीसदी और पिछले साल नवंबर में 0.58 फीसदी रही थी। इस महीने की शुरुआत में आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति में कहा था कि सर्दियों के महीनों में क्षणिक राहत को छोड़कर महंगाई बढ़ेगी। साथ ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई के दिसंबर तिमाही में 6.8 फीसदी और मार्च तिमाही में 5.8 फीसदी पर रहने का अनुमान लगाया था। दरअसल, आरबीआई पर खुदरा महंगाई की दर 2 फीसदी घट-बढ़ की गुंजाइश के साथ औसतन 4 फीसदी पर बनाए रखने की जिम्मेदारी है। वह मौद्रिक नीति समीक्षा में मुख्य ब्याज दर तय करते समय खुदरा महंगाई को निर्धारित दायरे में रखने पर ध्यान देता है। 

थोक महंगाई...फरवरी के बाद सबसे ज्यादा
सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में थोक महंगाई फरवरी के बाद सबसे ज्यादा है। उस दौरान यह 2.26 फीसदी थी। आंकड़ों के मुताबिक, आलोच्य अवधि में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की रफ्तार कुछ कम हुई। इस दौरान विनिर्मित वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। खाने-पीने की वस्तुओं की थोक कीमत नवंबर में 3.94 फीसदी बढ़ी, जबकि अक्तूबर में यह आंकड़ा 6.37 फीसदी पर था। इस दौरान सब्जियों और आलू की कीमतों में तेजी जारी रही। गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर भी 8.43 फीसदी के उच्च स्तर पर बनी रही। हालांकि, ईंधन और बिजली की महंगाई दर (-)9.87 फीसदी रही। 
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मांग बढ़ने का असर, अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत
इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, पिछले महीने से 0.8 फीसदी की तेज वृद्धि के साथ कोर-थोक महंगाई नवंबर में 22 महीने के उच्चतम स्तर 2.6 फीसदी पर पहुंच गई। हमारी राय में दिसंबर में कच्चा तेल और खनिज तेलों सहित मुख्य वस्तुओं एवं जिंसों की कीमतों में वृद्धि की कुछ हद तक भरपाई खाद्य महंगाई में कमी से हो जाएगी। वहीं, इलियर इंडिया के सीईओ एवं एमडी संजय कुमार ने कहा, विनिर्माण लागत बढ़ने से नहीं बल्कि मांग बढ़ने से कीमतों में तेजी रही। अगर यह पूरी तरह से मांग के कारण है तो स्वागत योग्य संकेत है। इससे अर्थव्यवस्था में सुधार का संकेत मिलता है। हालांकि, इस बात पर सावधानी से नजर रखनी होगी कि क्या आरबीआई महंगाई बढ़ने से मौद्रिक नीति को सख्त बनाएगा।

ईंधन की मांग नवंबर में 3.6 फीसदी घटी
देश में ईंधन की मांग नवंबर में सालाना आधार पर 3.6 फीसदी घट गई। हालांकि, अक्तूबर में ईंधन खपत सामान्य स्तर पर पहुंच गई थी, जो नवंबर में फिर नीचे आ गई। हालांकि, परिवहन और कारोबारी गतिविधियों में सुधार से ईंधन खपत महीने-दर-महीने के आधार पर लगातार तीसरे महीने बढ़ी है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में पेट्रोलियम उत्पादों की कुल मांग घटकर 1.78 करोड़ टन रह गई, जो नवंबर, 2019 में 1.85 करोड़ टन थी। वहीं, डीजल की मांग नवंबर में 6.9 फीसदी घटकर 70.4 लाख टन रही। इस दौरान एलपीजी की मांग चार फीसदी बढ़कर 23 लाख टन पर पहुंच गई। हालांकि, मासिक आधार पर इसमें 2.8 फीसदी गिरावट रही। एयरलाइंस का परिचालन सामान्य नहीं होने के कारण विमान ईंधन (एटीएफ) की बिक्री करीब 50 फीसदी घटकर 3,72,000 टन रही है। हालांकि, मासिक आधार पर एटीएफ की मांग फीसदी सुधरी है। 
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