भारतीय उद्योग जगत ने मांग व आपूर्ति के पहलुओं का हवाला देते हुए कम ब्याज दरों की मांग की है ताकि निजी निवेश बढ़ सके। उद्योग का कहना है कि इससे सरकार को नोटबंदी के पूरे लाभ को हासिल करने में मदद मिलेगी।
एक साक्षात्कार में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की प्रेसिडेंट शोबना कामिनेनी ने कहा कि उद्योग 1 जुलाई से जीएसटी क्रियान्वयन के लिए समुचित रूप से तैयार है और उद्योग की राय है कि डिमेरिट और लग्जरी वस्तुओं पर लगाए जाने वाले उपकर के लिए एक निश्चित अवधि निर्धारित की जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि एंटी-प्रोफिटीयरिंग प्रावधान का इस्तेमाल मनमर्जी वाले तरीके से नहीं होना चाहिए। कामिनेनी ने कहा कि खराब कर्जों से निपटने के लिए आया हालिया अध्यादेश पिछले दो सालों से कर्ज देने में संकोच कर रहे बैंकों में कर्ज देने का आत्मविश्वास जगाएगा। लेकिन कर्ज की मांग में तेजी लाने के लिए उद्योग को कम ब्याज दरों की जरूरत होगी।
कामिनेनी ने कहा कि दरों में कटौती वास्तव में नोटबंदी के चक्र को पूरा करती है। नोटबंदी केवल काले धन पर लगाम लगाने व प्रणाली में और अधिक करदाताओं को लाने के लिए ही नहीं की गई थी। इसका एक भाग यह भी था कि यह किस प्रकार अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद कर सकती है।