हाल ही में चर्चा में आई भारतीय माइक्रोब्लॉगिंग साइट कू की मातृ कंपनी में चीन के निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर इससे बाहर निकल रहे हैं। कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी।
कू के सह-संस्थापक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अपरामेय राधाकृष्ण ने कहा कि अन्य निवेशकों ने चीन के निवेशकों की नौ प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जाहिर की है।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार और ट्विटर के बीच तनातनी के बाद कू को खासी चर्चा मिली है। इसके बाद से कू को अब तक तीस लाख बार से अधिक डाउनलोड किया जा चुका है। साथ ही इसके 10 लाख से अधिक सक्रिय यूजर भी हो चुके हैं।
कू के निवेशकों में एस्सेल पार्टनर्स, 3वन4 कैपिटल, ब्लूम वेंचर्स और कलारी कैपिटल्स शामिल हैं। इनके अलावा चीन से संबंधित वैश्विक वेंचर कैपिटल कंपनी शुनवेई ने कू की मातृ कंपनी बॉम्बीनेट में निवेश किया है।
राधाकृष्ण ने जानकारी दी है कि शुनवेई ने भारत की कंपनी के एक अन्य एप वोकल के लिए भी निवेश किया था। तब कू की शुरुआत भी नहीं हुई थी।
गौरतलब है कि हाल ही में फ्रांस के सुरक्षा विशेषज्ञ ने कू एप के यूजर्स को चेतावनी देते हुए कहा था कि इस एप पर जिनके भी अकाउंट हैं, वे सुरक्षित नहीं हैं। उनके डाटा को लीक किया जा रहा है।
सुरक्षा विशेषज्ञ बैपटिस्ट ने कहा कि उन्होंने ट्विटर पर यूज़र्स के अनुरोध पर कू एप पर 30 मिनट बिताए और पाया कि भारतीय माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म अपने यूजर्स की संवेदनशील जानकारी जैसे कि ईमेल एड्रेस, नाम और जन्मदिन के साथ-साथ कई अन्य जानकारियां लीक कर रहा है। उन्होंने कू एप के बारे में अपनी इस शोध को विस्तार से बताने के लिए कई ट्वीट किए।
इस दावे के बाद कू के सह-संस्थापक और सीईओ अप्रमेय राधाकृष्ण ने कहा है कि डाटा लीक का विवाद फालतू में बनाया जा रहा है। डाटा को लेकर जो दावा किया गया वह यूजर्स की इजाजत के बाद लिया गया डाटा है। उन्होंने कहा कि जब कोई यूजर कू एप पर अपनी प्रोफाइल बनाता है तब उससे ई-मेल, मोबाइल नंबर, जन्म तारीख, लिंग और शिक्षा जैसी जानकारियां ली जाती हैं।