2019 में भारतीय स्टार्टअप्स में चीन का निवेश 12 गुना बढ़कर 4.6 अरब डॉलर रहा। डाटा विश्लेषण फर्म ग्लोबल डाटा ने बताया कि 2016 में यह निवेश महज 38.1 करोड़ डॉलर था। अभी 24 में से 17 यूनीकॉर्न स्टार्टअप में अलीबाबा और टेंसेंट जैसे कॉरपोरेट और निवेश फर्म पैसे लगाती हैं। अलीबाबा और सहयोगी कंपनी ने पेटीएम, स्नैपडील, बिगबास्केट व जोमैटो में 2.6 अरब डॉलर लगाया है।
टेनसेंट ने अन्य के साथ मिलकर पांच यूनिकार्न (ओला, स्विगी, हाइक, ड्रीम 11 और बायजू) में 2.4 अरब डॉलर का निवेश किया है। देश के स्टार्टअप में निवेश करने वाली चीन के अन्य प्रमुख निवेशकों में मेटुआन-डाइनपिंग, दिदी चुक्सिंग, फोसुन, शुनवेई कैपिटल, हिलहाउस कैपिटल ग्रुप और चीन-यूरेसिया एकोनॉमिक कोअपरेशन फंड शामिल हैं। ग्लोबल डाटा में प्रधान प्रौद्योगिकी विश्लेषक किरण राज ने कहा कि पिछले साल तक चीन भू-राजनीतिक तनाव से बेपरवाह मध्यम से दीर्घकाल में अच्छी वृद्धि की उम्मीद में भारतीय प्रौद्योगिकी स्टार्टअप पर उल्लेखनीय रूप से दांव लगा रहा था।
उन्होंने कहा कि हालांकि, हाल में सीमा पर तनाव और भारत द्वारा एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) को कड़ा किये जाने से चीनी निवेशकों के लिये थोड़ी अड़चनें पैदा हुई हैं। कोविड-19 संकट के बीच दबाव वाली कंपनियों के पड़ोसी देशों की कंपनियों द्वारा अधिग्रहण की आशंका को दूर करने के लिये यह कदम उठाया गया। उन्होंने कहा कि हालांकि यह अस्थायी उपाय है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश संबंधों को देखते हुए भविष्य में ही दीर्घकालीन प्रभाव देखने को मिल सकता है।