2030 तक देश में अभी मौजूद एयरपोर्ट्स की संख्या में इजाफा करना पड़ेगा, क्योंकि पांच साल बाद अभी मौजूद ज्यादातर एयरपोर्ट अपनी कैपिसिटी को पार कर जाएंगे। हवाई यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ एयरलाइन कंपनियों के पास भी प्लेन को खड़ा करने के लिए जगह नहीं बचेगी।
बड़े एयरपोर्ट्स पर बढ़ रही है संख्या
देश के बड़े एयरपोर्ट्स में शुमार दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में हवाई यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और यहां कुछ सालों में पैर रखने की भी जगह नहीं बचेगी। वहीं छोटे शहरों जैसे कि अगरतला, देहरादून, गुवाहाटी, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, पुणे, श्रीनगर और त्रिचि भी फिलहाल अपनी डिजाइन की गई क्षमता से ज्यादा का ऑपरेशन कर रहे हैं।
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2022 तक एयरपोर्ट्स पर हो जाएगी यात्रियों की ज्यादा भीड़
देश में स्थित सभी एयरपोर्ट्स अपनी स्ट्रकचरल कैपेसिटी को 2022 तक पार कर लेंगे। स्ट्रकचरल कैपेसिटी वो होती है, जिसमें एयरपोर्ट अधिकतम यात्रियों की संख्या के साथ ही अपने ऑपरेशन भी आसानी से कर सकेगा। इसके बाद एयरपोर्ट को नई साइट पर शिफ्ट होना ही पड़ेगा। दिल्ली के पास यूपी के नोएडा जिले में जेवर के पास एयरपोर्ट को बनाने की मंजूरी दी जा चुकी है। 2017 में 103 मीलियन यात्री हवाई सफर कर चुके हैं।
एयरलाइंस के सामने आने वाली हैं ये दिक्कतें
एयरलाइंस के पास आने वाले पांच साल में एयरपोर्ट पर सबसे बड़ी दिक्कतें आने वाली हैं। इनमें आगमन और प्रस्थान के लिए स्लॉट और प्लेन को खड़ा करने के जगह मिलना है। कई एयरपोर्ट्स पर एक या दो रनवे हैं, जिन पर प्लेन का आगमन या प्रस्थान होता है। इसके अलावा प्लेन को खड़ा करने के लिए भी जगह की भारी कमी होने की संभावना है, क्योंकि कंपनियां 350-400 एयरक्रॉफ्ट खरीदने का पहले ही ऑर्डर दे चुकी हैं। इससे अभी ही प्लेन को खड़ा करने में दिक्कतों का सामना कर रहे हवाई अड्डों के बजाए बड़े एयरपोर्ट्स के पास मौजूद छोटे एयरपोर्ट पर निगाह रखनी होगी। जैसे दिल्ली के पास में आगरा, जयपुर, चंडीगढ़, अमृतसर आदि ऑप्शन फिलहाल हैं।
रात में कहां करेंगे प्लेन को खड़ा
एयलांइस ए320 और बी 737 जैसे बड़े विमान अपने बेड़े में शामिल कर रही हैं। इनके साथ सबसे बड़ी समस्या यह आने वाली है कि छोटे एयरपोर्ट्स पर रात के समय कैसे खड़ा करेंगे, क्योंकि अभी भी रात के समय प्लेन को खड़ा करने के लिए जगह नहीं मिल रही है। पांच साल बाद स्थिति और विकराल होने की संभावना है।