गौतमबुद्ध नगर जिले में बनने वाले देश के सबसे बड़े जेवर हवाई अड्डे को बनाने का ठेका ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी को मिला है। यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तीसरा हवाई अड्डा होगा। इससे पहले दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट से विमानों का संचालन होता है। आईजीआई हवाई अड्डे से प्रस्तावित जेवर एयरपोर्ट की दूरी 80 किलोमीटर है। यह एयरपोर्ट यमुना एक्सप्रेस वे के जेवर टोल प्लाजा से काफी नजदीक पड़ेगा। इस एयरपोर्ट के निर्माण से आईजीआई एयरपोर्ट पर यात्रियों और विमानों की संख्या में कमी हो जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि कई विमानों का संचालन यहां पर शिफ्ट कर दिया जाएगा।
इस हवाई अड्डे को बनाने के लिए चार कंपनियों ने बोली लगाई थी, जिसमें अडानी समूह, एनकोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट होल्डिंग लिमिटेड और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) शामिल थे। ज्यूरिख एयरपोर्ट ने प्रति यात्री फीस के लिए 400.97 रुपये, DIAL (दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड) ने 351 रुपये, अडानी इंटरप्राइजेज ने 360 रुपये और एनकोरेज ने 205 रुपये की बोली लगाई थी। प्रति यात्री फीस वो होती है, जो एयरपोर्ट का रखरखाव करने वाली कंपनी यात्रियों से वसूलेगी और इसे सरकार के पास जमा कराएगी।
जेवर हवाई अड्डे का नाम नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट होगा। इस प्रोजेक्ट के नोडल ऑफिसर शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि जब हवाई अड्डा पूरी तरह बन जाएगा तो यह 5,000 हेक्टेयर में फैला रहेगा। इसे बनाने में 29,560 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पूरी तरह बन जाने के बाद यह भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने 84 फीसदी से अधिक जमीन अधिग्रहण कर यमुना अथॉरिटी को कब्जा भी दिला दिया है।