दूरसंचार मंत्रालय के मुताबिक, नई दूरसंचार नीति का प्राथमिक उद्देश्य केवल राजस्व एकत्रित करना नहीं, बल्कि देश के हर कोने में संचार व्यवस्था को पुख्ता करना है। कंपनियों पर टैक्स का भार कम करने के लिए विभिन्न स्तरों के बजाय एक ही स्तर पर शुल्क लिया जाएगा।
साथ ही स्पेक्ट्रम में भी इसी तरह की व्यवस्था होगी, जिसके बाद कंपनियां तेजी से सेवा का विस्तार कर सकेंगी। गौरतलब है कि नई नीति का मकसद 2022 तक 40 लाख नौकरियों का सृजन करना भी है। इसके अलावा, 100 अरब डॉलर निवेश आकर्षित करना और हर नागरिक के लिए 50 एमबीपीएस ब्रॉडबैंड कवरेज सुनिश्चित करना है।
दूरसंचार आयोग द्वारा हाल में मंजूर नीति में इस क्षेत्र की समस्याओं का समाधान भी बताया गया है, जिनमें लाइसेंस और स्पेक्ट्रम इस्तेमाल शुल्क के अलावा, सार्वभौमिक सेवा बाध्यता कोष शुल्क शामिल है।
नई नीति के तहत इस क्षेत्र में कारोबार सुगम बनाने के लिए उपाय किए गए हैं। आयोग की ओर से मंजूर नीति को अगले सप्ताह केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया जाएगा, जहां से हरी झंडी मिलते ही दूरसंचार मंत्रालय नई नीति को लागू करेगा।