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Year Ender 2024: धीमी वृद्धि दर व महंगाई के बावजूद अर्थव्यवस्था के लिए मिला-जुला रहा साल 2024, अब आगे क्या?

Thu, 26 Dec 2024 07:28 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Year Ender 2024 Economy: वर्ष 2024 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मिला-जुला रहा। इस साल नई उभरती चुनौतियों के बीच कई उल्लेखनीय सफलताएं भी हासिल हुईं। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था ने लचीलापन दिखाया, लेकिन घरेलू मोर्चे पर लगातार खड़ी हो रही चुनौतियों ने आशावाद को कुछ हद तक नरम कर दिया। आइए 2024 में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन पर डालें एक नजर।
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ईयर इंडर 2024 - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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वर्ष 2024 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मिला-जुला रहा। इस साल नई उभरती चुनौतियों के बीच कई उल्लेखनीय सफलताएं भी हासिल हुईं। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था ने लचीलापन दिखाया, लेकिन लगातार घरेलू कारणों से बाजार में जारी आशावाद को कुछ हद तक नरम कर दिया। बीत रहा साल अर्थव्यवस्था के लिहाज से कैसा रहा, आइए विस्तार से जानें।

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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विकास 

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत 2024 में एक उज्ज्वल स्थान के रूप में उभरा। भू-राजनीतिक तनाव और उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में सुस्त रिकवरी के बावजूद, भारत मार्च 2024 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में 8.2% की प्रभावशाली जीडीपी वृद्धि दर हासिल करने कामयाब रहा। यह वृद्धि मजबूत घरेलू मांग, सरकारी पहल और निर्यात क्षेत्र में लचीलेपन के कारण रही।

विदेशी मुद्रा भंडार - फोटो : Agency

मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार 

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2024 में मजबूत बना रहा, जिससे वैश्विक अनिश्चितताओं और मुद्रा की अस्थिरता से निपटना आसान हुआ। वर्ष के अधिकांश समय में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 600 अरब डॉलर के आसपास रहा, जिससे रुपये को सहारा मिला और बाहरी व्यापार और भुगतान में स्थिरता सुनिश्चित हुई। अपनी बढ़ती आर्थिक ताकत के साथ, भारत ने सितंबर में दुनिया के सबसे बड़े विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों की श्रेणी में शामिल होने की महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में भारत ने जिससे चीन, जापान और स्विटजरलैंड के बाद वैश्विक स्तर पर चौथा स्थान किया।  RBI के आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 27 सितंबर को समाप्त सप्ताह में 12.588 बिलियन डॉलर बढ़कर  704.885 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।

खुदरा महंगाई - फोटो : Agency

घरेलू खर्च में वृद्धि 

2024 में भारतीय बाजार में उपभोक्ताओं का विश्वास लौटा और परिवारों केखर्च में वृद्धि देखी गई। यह खर्च विशेष रूप से खुदरा, ऑटोमोबाइल और यात्रा जैसे क्षेत्रों में दिखा। बढ़ते खर्च पर लोगों की बेहतर आय और अधिक आशावाद का असर दिखा। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के एक कार्य पत्र (वर्किंग पेपर) के अनुसार, 2024 में स्वतंत्रता के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब भोजन पर घरेलू व्यय कुल मासिक व्यय के आधे से भी कम हो गया है। पेपर के अनुसार, "आधुनिक भारत (स्वतंत्रता के बाद) में यह पहली बार है कि भोजन पर औसत घरेलू व्यय परिवारों के कुल मासिक व्यय के आधे से भी कम है और यह महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है।" ग्रामीण उपभोग में वृद्धि ने इस प्रवृत्ति को और मजबूत किया। बेहतर कृषि आय और ग्रामीण भारत के लिए सरकारी समर्थन से भी उपभोग में वृद्धि को मदद मिली।

सेवा क्षेत्र की पीएमआई - फोटो : i stock

मजबूत पीएमआई रीडिंग 

विनिर्माण और सेवाओं के लिए क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) ने 2024 में लगातार विस्तार का संकेत दिया, इसका औसत पूरे वर्ष 55 से ऊपर रहा। बीते साल औद्योगिक गतिविधि और सेवा क्षेत्र में मजबूत वृद्धि दिखी। ये क्षेत्र भारत की आर्थिक गति में प्रमुख योगदानकर्ता हैं। उन्नत बुनियादी ढांचे पर सरकार के फोकस के नतीजे सामने आए हैं। अधिक रोजगार सृजित करने और दीर्घकालिक उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से राजमार्गों, रेलवे और शहरी विकास परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश की घोषणा की गई है। नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (एनआईपी) परियोजनाओं में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई, जिससे आर्थिक गतिविधियों को और बढ़ावा मिला।

विदेशी निवेश बढ़कर 29.8 अरब डॉलर (प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला / आईस्टॉक

रिकॉर्ड तोड़ एफडीआई स्तर 

विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण निवेश के साथ, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)का प्रवाह वर्ष 2000 के बाद से 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया। उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और निवेशक-अनुकूल नीतियों जैसी पहलों ने वैश्विक पूंजी को आकर्षित करना जारी रखा।  वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही के दौरान FDI में 26% की वृद्धि देखी गई, और यह 42.1 अरब डॉलर तक पहुंच गई।

जीएसटी परिषद की बैठक - फोटो : ANI

मजबूत जीएसटी संग्रह 

वर्ष 2024 में मासिक जीएसटी संग्रह औसतन 1.7 लाख करोड़ रुपये रहा। इस वर्ष कर अनुपालन और दक्षता के लिए नए मानक स्थापित किए गए। कर संग्रह बढ़ने से आर्थिक गतिविधि मजबूत हुई। कल्याणकारी योजनाओं पर बढ़ते खर्च के बावजूद सरकार को अपने राजकोषीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिली।

निर्यात - फोटो : Istock

आयात-निर्यात के आंकड़ों में सकारात्मक बदलाव

साल 2024 में भारत के आयात और निर्यात के आंकड़ों में भी सकारात्मक सुधार दिखा। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात में वृद्धि हुई, जबकि वैश्विक मूल्य में नरमी के कारण कच्चे तेल के आयात को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया गया। जून तिमाही में चालू खाता घाटा जीडीपी के 1.1% पर सीमित रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 1% की तुलना में एक स्वस्थ स्तर है। हालांकि, इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रमुख निर्यातक देशों में मांग में कमी के कारण वस्तुओं के निर्यात में गिरावट के कारण सितंबर तिमाही में चालू खाता घाटा जीडीपी के 1.6 प्रतिशत पर पहुंच सकता है, जो सात तिमाहियों का निचला स्तर है।

जीडीपी में वृद्धि से अर्थशास्त्री उत्साहित - फोटो : एएनआई

अब बात साल 2024 की आर्थिक चुनौतियों की

अच्छी विकास दर के बावजूद अर्थव्यवस्था पर 2024 में महंगाई का दवाब दिखा। बाजार के लिए मुद्रास्फीति एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय साबित हुई। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक के 2-6% के लक्ष्य रेंज के ऊपरी स्तर के आसपास मंडराती दिखी। हालांकि, बढ़ती खाद्य और ईंधन की कीमतों का लोगों के घर के बजट पर असर दिखा। इससे शहरी क्षेत्रों में उपभोग पैटर्न प्रभावित हुआ। सब्जियों की कीमतों में उछाल से अक्तूबर में, भारत की खुदरा मुद्रास्फीति 14 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई। अक्तूबर में 6.21% की वार्षिक खुदरा मुद्रास्फीति ने एक साल से अधिक समय में पहली बार केंद्रीय बैंक के सहनशीलता बैंड को पार कर गया। जानकारों के अनुसार दिसंबर से, हिंदुस्तान यूनिलीवर, गोदरेज कंज्यूमर, डाबर, टाटा कंज्यूमर, पारले प्रोडक्ट्स, विप्रो कंज्यूमर, मैरिको, नेस्ले और अदाणी विल्मर जैसी फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) कंपनियां उच्च कमोडिटी लागत और बढ़ी हुई सीमा शुल्क की भरपाई के लिए कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। चाय और खाद्य तेल से लेकर साबुन और स्किन क्रीम तक की कीमतों में 5 से 20% तक का इजाफा दिख सकता है, जो 12 महीनों में सबसे बड़ी मूल्य वृद्धि होगी।

जीडीपी वृद्धि दर - फोटो : जीडीपी वृद्धि दर

धीमी जीडीपी वृद्धि 

2023-24 की विकास दर प्रभावशाली रही थी। हालांकि, इस साल के तिमाही आंकड़ों में मंदी के संकेत मिले। वित्तीय वर्ष 2024 की दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि दर 5.4% रही, जो पिछली तिमाहियों की तुलना में काफी कम है। इसका कारण विनिर्माण उत्पादन में कमी और रियल एस्टेट व उपभोक्ता वस्तुओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कमजोर मांग को माना गया। इस बीच, एमपीसी ने भारत के वित्त वर्ष 25 के जीडीपी विकास अनुमान को 7.2% से घटाकर 6.6% कर दिया है। आरबीआई के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस महीने की एमपीसी बैठक के दौरान घोषणा की। तीसरी तिमावी के लिए जीडीपी विकास दर के पूर्वानुमान को भी 7.4% से घटाकर 6.8% कर दिया गया है। वृद्धि दर में संशोधन ने वैश्विक व्यापार में मंदी, सख्त मौद्रिक स्थितियों और मुद्रास्फीति के दबावों के प्रभाव पर चिंताओं को खुले तौर जाहिर कर दिया है।
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आरबीआई - फोटो : PTI

अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखना चुनौती

धीमी वृद्धि दर और महंगाई की चुनौतियों के बीच अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखना केंद्रीय बैंक और सरकार के लिए नए साल में सबसे बड़ी चुनौती होगी। बाजार को आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति से अगली एमपीसी बैठक में नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है। हालांकि, इससे महंगाई के मोर्चे पर चुनौती बढ़ सकती है, नीति-निर्धारकों को यह भी ध्यान रखना होगा। देश में आम आदमी के घर कस बजट भी महंगाई से कम से कम प्रभावित हो इस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। निर्माण क्षेत्र में नियामकीय सुधार की भी जरूरत होगी ताकि हम अपने आयात-निर्यात के आंकड़े में सुधार कर सकें, नहीं तो देश की नरम पड़ी वृद्धि दर और ज्यादा प्रभावित हो सकती है। कुल मिलाकर देखें तो नए साल में अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि दर, निवेश और बेहतर राजकोषीय आंकड़ों को बनाए रखना नीति निर्धारकों के लिए टेढ़ी खीर साबित होगी।
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