खाद्य वस्तुओं और ईंधन की कीमतों में नरमी के कारण थोक मूल्य मुद्रास्फीति (WPI) मई में 14 महीने में न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई। आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं में मई में 1.56 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जबकि अप्रैल में यह आंकड़ा 0.86 प्रतिशत था। सब्जियों, प्याज, आलू और दालों में नकारात्मक मुद्रास्फीति देखी गई।
मई में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (WPI) में बड़ी गिरावट देखी गई। खाद्य वस्तुओं, विनिर्मित उत्पादों और ईंधन की कीमतों में कमी आने की वजह से थोक महंगाई घटकर 0.39 फीसदी पर आ गई। अप्रैल में WPI आधारित मुद्रास्फीति 0.85 प्रतिशत थी। पिछले साल मई में यह 2.74 प्रतिशत थी। उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'मई 2025 में मुद्रास्फीति की सकारात्मक दर मुख्य रूप से खाद्य उत्पादों, बिजली, अन्य विनिर्माण, रसायन, रासायनिक उत्पादों, अन्य परिवहन उपकरणों और गैर-खाद्य वस्तुओं के विनिर्माण आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण है।'
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थोक मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के मुताबिक, मई में खाद्य वस्तुओं में 1.56 फीसदी की गिरावट देखी गई, जबकि अप्रैल में 0.86 फीसदी की गिरावट देखी गई थी, जबकि सब्जियों में भारी गिरावट देखी गई। मई में सब्जियों में 21.62 फीसदी की गिरावट देखी गई, जबकि अप्रैल में यह 18.26% थी। हालांकि, विनिर्मित उत्पादों में 2.04 प्रतिशत की मुद्रास्फीति देखी गई, जबकि अप्रैल में यह 2.62 प्रतिशत थी। ईंधन और बिजली में भी मई में 2.27 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जबकि अप्रैल में यह 2.18 प्रतिशत थी।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मौद्रिक नीति तैयार करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है। पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों से पता चलता है कि मई में खुदरा मुद्रास्फीति मुख्य रूप से खाद्य कीमतों में नरमी के कारण 2.82 फीसदी के साथ छह साल के निचले स्तर पर आ गई। मुद्रास्फीति में कमी के बीच आरबीआई ने इस महीने बेंचमार्क नीतिगत ब्याज दरों में 0.50 प्रतिशत की भारी कटौती कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया था।
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आईसीआरए के वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि थोक महंगाई में गिरावट व्यापक आधार पर हुई है, जिसमें खाद्य, गैर-खाद्य विनिर्माण, खनिज, ईंधन और बिजली क्षेत्रों ने इन महीनों के बीच गिरावट में योगदान दिया है। आगे आईसीआरए ने कहा कि इस्राइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद चालू महीने में कच्चे तेल की कीमतों में काफी तेजी आई है। इस बीच उद्योग चैंबर पीएचडीसीसीआई ने कहा कि थोक मुद्रास्फीति में गिरावट से कारोबारी धारणा को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि इससे उत्पादन की लागत कम होगी।