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World Bicycle Day 2021: उच्च वर्ग में तेजी से लोकप्रिय हो रही 'गरीबों की सवारी', स्वास्थ्य वजहों से युवा हो रहे फिदा

Thu, 03 Jun 2021 07:19 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आल इंडिया साइकिल मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (AICMA) के सेक्रेटरी जनरल केबी ठाकुर ने अमर उजाला को बताया कि वर्ष 2020-21 में उनके संगठन से जुड़ी साइकिल निर्माता कंपनियों ने कुल 1,21,65,800 साइकिलों की बिक्री की...
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एमटीबी हिमालयन साइकिल रेस - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार
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‘गरीबों की सवारी’ साइकिल अब तेजी से समाज के उच्च-मध्य वर्ग के लोगों की पसंद बनती जा रही है। अप्रैल 2021 में ऑल इंडिया साइकिल मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (AICMA) से जुड़ी देश की टॉप साइकिल निर्माता कंपनियों ने कुल 8.59 लाख साइकिलें बेची हैं। इनमें पांच हजार रुपये से कम कीमत वाली रोडस्टर साइकिलों की संख्या केवल 1,97,336 है तो पांच हजार से 40 हजार रुपये तक की उच्च कीमत वाली साइकिलों की संख्या 4,36,277 है। लॉकडाउन के कारण इस महीने विभिन्न सरकारी-संस्थाओं द्वारा खरीदी जाने वाली रोडस्टर साइकिलों की बिक्री नहीं हुई, जिससे उनकी कुल बिक्री संख्या काफी कम रह गई। कंपनियों ने इसी अप्रैल महीने में बच्चों के सेगमेंट में 1.43 लाख साइकिलें बेचीं हैं, तो 68,676 साइकिलों का निर्यात भी किया है।

पिछले वित्त वर्ष में ही दिख गया था ये ट्रेंड

वर्ष 2020-21 में AICMA की कंपनियों के द्वारा 1.21 करोड़ से अधिक साइकिलें बेची गई थीं। इसमें सबसे निचली (5000 रुपये से कम) कीमत वाली साइकिलों की संख्या 48.42 लाख थी तो उच्च कीमत वाली (5000 रुपये से 40 हजार रूपये) साइकिलों की संख्या 41.22 लाख थी। इसके आलावा देश में भारी संख्या में विदेश से आयातित महंगी साइकिलों की बिक्री भी हुई है। इसे मिलाकर देखें तो वर्ष 2020-21 में भी उच्च कीमत वाली साइकिलों की कुल बिक्री काफी ज्यादा रही थी। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य कारणों से युवाओं में बढ़ रही जागरूकता और ई-साइकिलों का बढ़ता चलन दुनिया को एक बार फिर साइकिल युग में ले जाने को तैयार है।

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कुल कितनी साइकिलों की हुई बिक्री

आल इंडिया साइकिल मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (AICMA) के सेक्रेटरी जनरल केबी ठाकुर ने अमर उजाला को बताया कि वर्ष 2020-21 में उनके संगठन से जुड़ी साइकिल निर्माता कंपनियों ने कुल 1,21,65,800 साइकिलों की बिक्री की। इनमें रोडस्टर यानी 5000 रुपये से कम मूल्य वाली साइकिलों की संख्या 48,42,649 थी तो पांच हजार से ऊपर की कीमत वाली साइकिलों की संख्या 41,22,337 थी। इसके आलावा बच्चों के वर्ग में 20,13,691 साइकिलों की बिक्री हुई।

भारत भारी संख्या में साइकिलों का निर्यात भी करता है। AICMA कंपनियों ने 2020-21 में 7,83,877 साइकिलों का विदेश में निर्यात भी किया। इसके आलावा अन्य वर्ग की 4,03,246 साइकिलों की सेल भी हुई।       

फैंसी साइकिलों की बिक्री में तेजी क्यों  

केबी ठाकुर ने कहा कि कोरोना ने लोगों को स्वास्थ्य की कीमत ज्यादा बेहतर ढंग से समझा दी है। लोगों को यह भी अहसास हो गया है कि कार-मोटरसाइकिल उन्हें ज्यादा आराम तो जरूर दे सकती हैं, लेकिन यह आरामतलबी उन्हें बीमार भी बना रही है। यही कारण है कि कोरोना काल में भारत सहित पूरी दुनिया में साइकिलों की बिक्री में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई।

साइकिल अब लोगों को स्वस्थ रखने का एक यंत्र बन गया है। आज बेंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली और कोलकाता जैसे शहरों में साइकिल से ऑफिस जाना युवाओं की पहली पसंद बनता जा रहा है। देश में 8000 से ज्यादा बड़े-छोटे शहरों में अब फैंसी साइकिलें ही लोगों की पसंद बन रही हैं।

ई-साइकिलें तेजी से हो रहीं लोकप्रिय

जीरो मोबिलिटी के सीईओ अंकित कुमार के अनुसार सामान्य साइकिलें युवाओं को आकर्षित नहीं कर रही थीं। वे इनसे एक्सरसाइज तो कर सकते थे, लेकिन इनसे ऑफिस नहीं आ-जा सकते थे। लेकिन अब ई-साइकिलों ने उनकी दोनों जरूरतों को एक साथ पूरा कर दिया है। अब युवा जब तक चाहें इसे साइकिल मोड पर चलाकर स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं, और जब भी थक जाएं इसे मोटर मोड पर डालकर 25 किलोमीटर प्रति घंटा की माध्यम रफ्तार से अपने ऑफिस भी जा सकते हैं।

वातावरण के अनुकूल ये ई-साइकिलें उन युवाओं की पहली पसंद बन रही हैं जो पर्यावरण के प्रति भी संवेदनशील हैं। कुछ किलोमीटर की दूरी रोजाना चलाकर आने-जाने से युवाओं को दोहरा लाभ मिल रहा है। वे अपने स्वास्थ्य के साथ वातावरण को बचाने का आनंद भी अनुभव भी कर रहे हैं।  

कितनी लागत

ई-साइकिलों की रेंज में इस समय 40 हजार रुपये तक की साइकिलें बेहद लोकप्रिय हैं, जो सिंगल चार्जिंग पर 70 किलोमीटर की दूरी तय करती हैं। अगर रोजाना इस्तेमाल की जाए तो ये साइकिलें पांच साल तक चलती हैं। इसके बाद इनकी बैटरी बदली जा सकती है जिसकी कीमत लगभग 13 हजार रुपये है। हालांकि, बाज़ार में 10-12 हजार रुपये से इनकी रेंज शुरू हो जाती है।
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यूरोपीय बाजारों में भी बढ़ी मांग

कोविड काल में यूरोपीय बाज़ारों में साइकिलों की बिक्री में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। अनुमान है कि यह बढ़ोतरी आगे भी बनी रहेगी और 2030 तक यूरोपीय बाज़ारों में तीन करोड़ से ज्यादा साइकिलों की बिक्री होगी। यह संख्या वहां पर वर्तमान में हर साल रजिस्टर किये गये कारों की संख्या से दोगुनी से भी ज्यादा है। साइकिल कंपनियां इस ट्रेंड से उत्साहित हैं।

यूरोपीय बाज़ारों में ई-साइकिलों का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। यहां 2019 में 37 लाख ई-साइकिलों की बिक्री हुई थी। अनुमान है कि 2030 तक यह संख्या 1.7 करोड़ तक पहुंच जायेगी। वातावरण स्वच्छता की दृष्टि से इस बदलते ट्रेंड को बेहद अहम बताया जा रहा है।

भारत दुनिया की ताकत

2.2 करोड़ से अधिक साइकिलों का हर साल उत्पादन करने वाला भारत इस श्रेणी में विश्व में दूसरे नंबर पर है तो साइकिलों के इस्तेमाल के मामले में दुनिया में तीसरे नंबर पर है। 7000 करोड़ ररुपये प्रति वर्ष से अधिक के वार्षिक बाज़ार में 2030 तक आठ फीसदी से अधिक प्रति वर्ष की बढ़ोतरी की भी उम्मीद की जा रही है।   

स्टील महंगाई का संकट

साइकिलों के निर्माण में आने वाली कुल लागत का 70 फीसदी हिस्सा स्टील का ही होता है। लेकिन आरोप है कि स्टील निर्माण में लगी कंपनियां अपनी मनमानी करती हैं और जब चाहे स्टील के दाम बढ़ा देती हैं। वहीं, साइकिल निर्माता स्टील की अचानक कीमतें बढ़ने के बाद भी साइकिलों की कीमतें नहीं बढ़ा पाते क्योंकि इससे सीधे उनकी बिक्री कम हो जाती है। यही कारण है कि AICMA ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि वे केंद्र सरकार के अधीन एक स्टील अथॉरिटी का गठन करें जो हर साल या समय-समय पर स्टील की कीमतों का उचित निर्धारण करें। इससे देश के अन्य उद्योगों को अनावश्यक महंगाई से बचाया जा सकेगा।
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