स्टार्टअप कंपनियों को विविधता के पैमाने पर पारंपरिक कंपनियों से बेहतर मान लिया जाता है, लेकिन यह सच नहीं है। कम से कम लैंगिक विविधता के मामले में तो स्टार्टअप कंपनियों की स्थिति पारंपरिक कंपनियों की तुलना में बहुत खराब है। यह खुलासा हुआ है प्राइवेटसर्कल रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट, जिसे अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के ऐन पहले जारी किया गया है।
प्राइवेटसर्कल रिसर्च की रिपोर्ट
किन कंपनियों को कहा जाता है यूनिकॉर्न?
इंडिया इंक में वैसी कंपनियों को रखा गया है, जो शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं। हालिया सालों में स्टार्टअप कंपनियों के सूचीबद्ध होने में तेजी आई है, लेकिन ओवरऑल शेयर बाजार की सूचीबद्ध कंपनियों में स्टार्टअप की हिस्सेदारी न के बराबर है। वहीं यूनिकॉर्न वैसी स्टार्टअप कंपनियों को कहा जाता है, जो शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं हुई हैं और जिनका मूल्यांकन 1 अरब डॉलर के पार निकल गया है। अभी भारत में इस तरह की 116 यूनिकॉर्न स्टार्टअप कंपनियां हैं।
सिर्फ 13 कंपनियों में 1 से ज्यादा महिला निदेशक
सबसे अच्छी है वित्त क्षेत्र की स्थिति
प्राइवेटसर्कल के विश्लेषण के अनुसार, वित्त क्षेत्र की यूनिकॉर्न कंपनियों में सबसे अधिक 16 महिला निदेशक हैं। इसके बाद सॉफ्टवेयर (8), रिटेल (7), बीमा (5), यात्रा एवं आतिथ्य (5) और उभरती प्रौद्योगिकी (4) क्षेत्र की यूनिकॉर्न कंपनियां हैं। कुछ कंपनियां जैसे कि सी।ई। इन्फो सिस्टम्स लिमिटेड (मैपमाईइंडिया), इनक्रेड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड, मोबिक्विक, पॉलिसी बाजार, नायका, जोमैटो और फ्रैक्टल एनालिटिक्स ने बोर्ड में तीन-तीन महिला निदेशकों को शामिल कर एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया है।