भारत के कॉरपोरेट जगत में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। सिर्फ मिड लेवल मैनेजमेंट में ही नहीं बल्कि पीछे दो दशकों में महिलाओं की संख्या तीन गुना बढ़ी है। देश में शीर्ष पदों पर काम करने वाली महिलाओं की संख्या साल 2004 में 11.7 प्रतिशत थी, यह आंकड़ा इस साल बढ़कर 36.5 प्रतिशत हो गया। लेकिन महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी के बावजूद सैलरी के मामले में महिलाएं अभी पीछे ही हैं। लिंग के आधार पर वेतन असमानता देश में एक गंभीर मुद्दा बनी हुई है।
भारतीय महिलाएं वैश्विक औसत से आगे
दुनिया की प्रमुख टैक्स और एडवाइजरी फर्म ग्रांट थॉर्नटन की वीमेन इन बिजनेस 2025 रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में सबसे ज्यादा भारत में महिलाएं शीर्ष पदों पर हैं। 2025 में यह आंकड़ा 36.5% रहा है। एशिया में थाईलैंड ऐसा देश हैं जहां वरिष्ठ प्रबंधन में महिलाओं की भूमिका 43.1 फीसदी है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में कंपनियों के पदों पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के पीछे का कारण महिलाओं की शिक्षा, काम करने की इच्छा और सांस्कृतिक बदलाव है।
पांच साल में कितनी बढ़ी महिलाओं की भागीदारी
दुनिया में किस शीर्ष पद पर कितनी महिलाएं
कमाई में महिलाएं पीछे
महिलाएं भले ही दफ्तरों में उच्च पद संभाल रही हैं, लेकिन कमाई के मामले में पीछे हैं। जॉब प्लेसमेंट प्लेटफॉर्म नौकरी की ‘द अनफ़िल्टर्ड ट्रुथ: व्हाट वीमेन प्रोफेशनल्स रियली वांट’ रिपोर्ट के अनुसार सभी उद्योगों में महिलाएं अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में कम कमाती हैं। यह अंतर विशेष रूप से वरिष्ठ स्तरों पर अधिक दिखाई पड़ता है. रिपोर्ट के अनुसार वेतन असमानता एक बड़ी चिंता बनी हुई है। 2 से 5 लाख रुपये प्रति वर्ष कमाने वाली केवल 11% महिलाओं ने पुरुषों से कम वेतन की शिकायत की। वहीं 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच कमाने वाली महिलाओं के बीच यह संख्या 26% थी।
पुरुषों और महिलाओं के वेतन में अंतर (शहर)
पुरुषों और महिलाओं के वेतन में अंतर (उद्योग)