सोने और चांदी के आभूषणों पर मूल्य आधारित शुल्क पर छूट मिले
धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच निर्यातकों की आय को स्थिर करने के लिए, जीजेईपीसी ने मौजूदा निश्चित दर वाले ड्यूटी ड्रॉबैक सिस्टम को मूल्य-आधारित (एड-वैलारेम) व्यवस्था से बदलने का प्रस्ताव दिया है। वर्तमान निश्चित ड्रॉबैक प्रणाली भुगतान किए गए शुल्क का केवल 75-80 प्रतिशत ही मिलता है, जिसके परिणामस्वरूप निर्यातकों को नुकसान होता है। 10 ग्राम सोने की कीमतें 99,000 रुपये से 1,25,000 रुपये के बीच होने के कारण, निश्चित वापसी प्रणाली अव्यवहारिक हो जाती है। मूल्य-आधारित प्रणाली आनुपातिक वापसी सुनिश्चित करेगी, जिससे आभूषण निर्यातकों को उचित मुआवजा और पूर्वानुमान मिलेगा।
ड्यूटी ड्रॉबैक योजना में प्लैटिनम और सोने की वस्तुओं को शामिल करना
परिषद ने प्लैटिनम आभूषणों और सोने की वस्तुओं को शुल्क छूट योजना में शामिल करने का भी आह्वान किया है। भारत से प्लैटिनम आभूषणों का निर्यात पिछले पांच वर्षों में लगभग 17 गुना बढ़ गया है, जिसका मुख्य कारण विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) में है जिन्हें शुल्क छूट का लाभ मिलता है।
इसके अलावा जीजेईपीसी ने सरकार से विदेशी पर्यटकों के लिए एक व्यापक कर वापसी योजना शुरु करने की मांग की है। परिषद वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव से निर्यात प्रभावित हो रहा है, ऐसे में परिषद ने विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) में परिचालन लचीलापन लाने की मांग है, जिसमें व्यापार की निरंतरता को सुनिश्चित हो और रोजगार की सुरक्षा हो सके। जीजेईपीसी ने निर्यात-उन्मुख रत्न व आभूषण क्षेत्र की तेजी से विकसित हो रही आवश्यकताओं के अनुरूप सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 में संशोधन की आवश्यकता पर बल दिया है। साथ ही प्रयोगशाला में उत्पादित हीरे (एलजीडी) के क्षेत्र में भारत के वैश्विक नेतृत्व को मान्यता देते हुए,आयातित एलजीडी बीजों पर मौजूदा शुल्क छूट को मार्च 2026 के बाद भी जारी रखने की सिफारिश की है।