3.अमेरिकी टैरिफ के बीच निर्यातक दिखा रहे सतर्कता
बाजार भागीदारों का कहना है कि रुपये की हर गिरावट, जिसमें बुधवार को 90 के स्तर के टूटने जैसी घटनाएं भी शामिल हैं ने आयातकों की तरफ से नई डॉलर मांग को जन्म दिया है। वहीं, निर्यातक ऊंचे रेट की उम्मीद में अपने डॉलर बेचने से हिचक रहे हैं। पूंजी प्रवाह कमजोर रहने से यह असंतुलन रुपये को और अधिक असुरक्षित छोड़ रहा है।
विशेषज्ञों की राय
एचएसबीसी के अर्थशास्त्रियों ने कहा कि अगर रुपये को अपने हाल पर छोड़ दिया जाए, तो यह अर्थव्यवस्था के लिए शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करेगा और बाहरी वित्तीय दबाव को संतुलित करने में मदद करेगा। उनके मुताबिक, ऊंचे शुल्क के दौर में धीरे-धीरे कमजोर होता रुपया सबसे बेहतर स्वाभाविक समायोजन है।
4. भारत-अमेरिकी व्यापार वार्ता में देरी को लेकर अनिश्चितता का माहौल
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में लंबे समय से चल रही अनिश्चितता ने विदेशी मुद्रा हेजिंग परिदृश्य को भी प्रभावित किया है। आयातक हेजिंग को बढ़ा रहे हैं, जबकि निर्यातकों में झिझक बनी हुई है, जिससे दबाव सीधे आरबीआई पर आ रहा है।
5. आरबीआई की रुपये पर दबाव कम करने की कोशिशें जारी
हालांकि आरबीआई बीच-बीच में गिरावट की रफ्तार को रोकने के लिए बाजार में दखल देता रहा है, लेकिन बैंकरों का कहना है कि आयातकों की हेजिंग और लगातार हो रहे डॉलर आउटफ्लो के कारण मांग इतनी अधिक है कि मुद्रा पर दबाव बना हुआ है। केंद्रीय बैंक की कोशिशें इसके विदेशी मुद्रा भंडार में कमी और फॉरवर्ड मार्केट में डॉलर की छोटी स्थिति के 5 महीने के उच्च स्तर 63.4 अरब डॉलर तक पहुंचने में झलकती हैं। हेजिंग एक वित्तीय रणनीति है, जिसका उपयोग निवेशक बाजeर की अस्थिरता से होने वाले संभावित नुकसान को कम करने के लिए करते हैं।